थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर में 0.83% तक पहुंची, जो नवंबर के -0.32% से बढ़ोतरी दर्शाती है; यह दो महीनों की नकारात्मक दर के बाद लगातार दूसरी वृद्धि है, मुख्य रूप से खाद्य उत्पादों, विनिर्माण और खनिजों की कीमतों में उछाल से प्रेरित; रसोई की वस्तुओं जैसे सब्जियों में अपस्फीति कम हुई, जबकि समग्र खाद्य लेखों में मामूली सकारात्मक बदलाव आया, जिससे घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा।
व्यापार मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि थोक मुद्रास्फीति ने दिसंबर में सकारात्मक क्षेत्र में प्रवेश किया, जो अर्थव्यवस्था के लिए चिंताजनक संकेत है। WPI सूचकांक 157.0 तक पहुंचा, जो नवंबर के 155.9 से 0.71% की मासिक वृद्धि दिखाता है। यह वृद्धि मुख्य रूप से विनिर्माण क्षेत्र की कीमतों में तेजी से हुई, जहां मुद्रास्फीति 1.82% दर्ज की गई, जबकि नवंबर में यह 1.33% थी।
प्राथमिक वस्तुओं में मुद्रास्फीति 0.21% रही, जिसमें खाद्य लेखों की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी शामिल है। रसोई की आवश्यक वस्तुओं पर असर साफ दिखा, जहां सब्जियों की अपस्फीति नवंबर के 20.23% से घटकर 3.50% रह गई, लेकिन समग्र खाद्य उत्पादों में कीमतें ऊपर चढ़ीं। खनिजों और मशीनरी उपकरणों के निर्माण में भी मूल्य वृद्धि ने मुद्रास्फीति को बढ़ावा दिया।
ईंधन और बिजली क्षेत्र में अपस्फीति -2.27% बनी रही, जो कुल दर को कुछ हद तक नियंत्रित रखने में मददगार साबित हुई। हालांकि, वस्त्र और अन्य विनिर्माण उत्पादों में कीमतों का उछाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का बोझ बढ़ा रहा है।
मुख्य आंकड़े तालिका:
प्रभावित क्षेत्रों के प्रमुख बिंदु:
| श्रेणी | दिसंबर WPI सूचकांक | मुद्रास्फीति दर (%) | नवंबर से तुलना (%) |
|---|---|---|---|
| सभी वस्तुएं | 157.0 | 0.83 | +0.71 |
| प्राथमिक वस्तुएं | 194.2 | 0.21 | +1.09 |
| खाद्य लेख | – | सकारात्मक बदलाव | – |
| विनिर्मित उत्पाद | – | 1.82 | +0.49 |
| ईंधन और बिजली | – | -2.27 | +0.28 |
खाद्य उत्पादन: दालों और अनाजों में स्थिरता बनी, लेकिन फलों और सब्जियों की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं से कीमतें प्रभावित।
विनिर्माण: मशीनरी और उपकरणों की मांग बढ़ने से लागत ऊपर, जो औद्योगिक क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है।
खनिज: वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव से घरेलू स्तर पर असर।
रसोई प्रभाव: दूध और तेल जैसी वस्तुओं में मामूली वृद्धि से मध्यम वर्ग के बजट पर दबाव, जो खुदरा मुद्रास्फीति को भी प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि मौसमी कारकों और वैश्विक आपूर्ति मुद्दों से जुड़ी है, जो आगे चलकर RBI की मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकती है।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं और टिप्स पर आधारित है।






