“आधुनिक कारों में स्टेपनी हटाने का मुख्य कारण वजन कम करना, माइलेज बढ़ाना और बूट स्पेस बढ़ाना है। ईवी और हाइब्रिड मॉडल्स में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जहां टायर रिपेयर किट और रन-फ्लैट टायर्स विकल्प बन रहे हैं। भारत में 2020 के नियम बदलाव से मैन्युफैक्चरर्स को फायदा हुआ, लेकिन ड्राइवर्स के लिए पंक्चर में चुनौतियां बढ़ीं।”
आजकल लग्जरी से लेकर बजट कारों तक में स्टेपनी का गायब होना आम हो गया है। मैन्युफैक्चरर्स जैसे Maruti Suzuki, Tata Motors और Hyundai इस ट्रेंड को फॉलो कर रहे हैं, खासकर ईवी सेगमेंट में। उदाहरण के तौर पर, Tata Nexon EV और MG ZS EV जैसे मॉडल्स में अब टायर रिपेयर किट स्टैंडर्ड आती है, जबकि स्पेयर व्हील ऑप्शनल या अनुपलब्ध है।
यह बदलाव ईंधन दक्षता पर फोकस से आया है। एक स्पेयर टायर का वजन 15-20 किलोग्राम तक होता है, जो कार की कुल वेट को बढ़ाता है। इसे हटाने से माइलेज में 1-2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है, जो 2026 के सख्त एमिशन नॉर्म्स के तहत जरूरी है। ईवी में बैटरी रेंज बढ़ाने के लिए यह और भी महत्वपूर्ण है, जहां हर किलो वेट मायने रखता है।
भारत में MoRTH के 2020 के नोटिफिकेशन से M1 कैटेगरी (8 सीट तक की पैसेंजर कारें) में ट्यूबलेस टायर्स वाली गाड़ियों को स्पेयर टायर कैरी करना अनिवार्य नहीं रहा, बशर्ते टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) और रिपेयर किट मौजूद हो। इससे मैन्युफैक्चरर्स को 5,000-10,000 रुपये प्रति कार की बचत हो रही है। लेकिन ड्राइवर्स के लिए साइडवॉल डैमेज या बड़े पंक्चर में समस्या बढ़ गई, जहां रिपेयर किट बेकार साबित होती है।
रन-फ्लैट टायर्स जैसे Michelin Pilot Sport या Bridgestone Potenza अब ज्यादा इस्तेमाल हो रहे हैं, जो पंक्चर के बाद भी 80 किमी तक 80 किमी/घंटा की स्पीड से चल सकते हैं। हालांकि, ये रेगुलर टायर्स से 20-30 प्रतिशत महंगे हैं और भारत की खराब रोड्स पर कम टिकाऊ साबित हो सकते हैं।
स्टेपनी हटाने के मुख्य कारणों की तालिका:
भारत में प्रभावित प्रमुख मॉडल्स की लिस्ट:
| कारण | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| वजन कम करना | स्पेयर टायर 15-20 किग्रा वेट जोड़ता है, इसे हटाने से कार हल्की होती है। | माइलेज में 1-2% सुधार, ईवी में रेंज 5-10 किमी बढ़ सकती है। |
| स्पेस ऑप्टिमाइजेशन | बूट में ज्यादा जगह मिलती है, ईवी में बैटरी पैक के लिए उपयोगी। | लगेज कैपेसिटी 50-100 लीटर तक बढ़ जाती है। |
| लागत बचत | मैन्युफैक्चरर्स को प्रति कार 5,000-10,000 रुपये की बचत। | कस्टमर्स को सस्ती कार मिलती है, लेकिन रिपेयर किट पर निर्भरता बढ़ती है। |
| तकनीकी एडवांसमेंट | TPMS, रन-फ्लैट टायर्स और रिपेयर किट जैसे ऑप्शंस उपलब्ध। | पंक्चर में तुरंत सॉल्यूशन, लेकिन बड़े डैमेज में रोडसाइड असिस्टेंस जरूरी। |
| रेगुलेटरी सपोर्ट | भारत में 2020 से स्पेयर टायर अनिवार्य नहीं। | मैन्युफैक्चरर्स को फ्लेक्सिबिलिटी, लेकिन सेफ्टी कंसर्न्स बढ़े। |
ईवी सेगमेंट: Tata Punch EV, Mahindra XUV400 – रिपेयर किट स्टैंडर्ड, स्पेयर ऑप्शनल।
हाइब्रिड: Toyota Innova Hycross – कुछ वेरिएंट्स में स्पेयर नहीं।
बजट कारें: Maruti Swift 2026 मॉडल – TPMS के साथ किट, स्पेयर एक्स्ट्रा।
लग्जरी: BMW X3, Mercedes-Benz C-Class – रन-फ्लैट टायर्स से स्पेयर की जरूरत कम।
ट्रेंड: 2025-2026 में 40% नई कारों में स्पेयर नहीं होगा, खासकर अर्बन यूजर्स के लिए।
ड्राइवर्स अब रोडसाइड असिस्टेंस पर ज्यादा निर्भर हैं, जैसे RSA प्लान्स जो पंक्चर फिक्सिंग कवर करते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों या हाईवे पर जहां सर्विस देरी से पहुंचती है, यह रिस्की हो सकता है। मैन्युफैक्चरर्स सलाह देते हैं कि TPMS अलर्ट पर तुरंत चेक करें और रिपेयर किट हमेशा चेक रखें।
Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न स्रोतों से प्राप्त न्यूज, रिपोर्ट्स और टिप्स पर आधारित है।






