“भारत में आयकर रिटर्न फाइलिंग के ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि करोड़पति टैक्सपेयर्स की संख्या में 22% का उछाल आया है, जबकि कुल टैक्स बेस में सिर्फ 1.22% की बढ़ोतरी हुई। 5-10 लाख आय वाले सबसे ज्यादा ITR फाइल कर रहे हैं, जो डबल-डिजिट ग्रोथ दिखा रहा है। उच्च आय वालों में compliance बेहतर हो रही है, लेकिन मिडिल इनकम सेगमेंट में स्टैग्नेशन चिंता का विषय है।”
आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल से मिले डेटा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 के अप्रैल से दिसंबर तक 9 करोड़ से ज्यादा आयकर रिटर्न दाखिल किए गए। यह पिछले साल की इसी अवधि के 8.92 करोड़ ITR से महज 1.22% ज्यादा है। इस मामूली बढ़ोतरी से साफ है कि देश का टैक्स बेस स्थिर बना हुआ है, जबकि उच्च आय वाले सेगमेंट में तेज ग्रोथ देखी जा रही है।
करोड़ रुपये से ज्यादा आय वाले टैक्सपेयर्स, जिन्हें आमतौर पर करोड़पति टैक्सपेयर्स कहा जाता है, की संख्या में 22% का जोरदार उछाल दर्ज किया गया। यह ग्रोथ कुल टैक्स बेस की तुलना में कहीं ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उछाल बेहतर compliance, डेटा एनालिटिक्स और AIS (Annual Information Statement) जैसे टूल्स की वजह से है। उच्च आय वाले लोग वेज ग्रोथ, बोनस और बिजनेस प्रॉफिट से फायदा उठा रहे हैं, जिससे उनकी रिपोर्टिंग बढ़ी है।
उच्च आय स्लैब्स में यह ट्रेंड और स्पष्ट है। 50 लाख से ज्यादा आय वाले सभी ब्रैकेट्स में 20% से अधिक ग्रोथ हुई है। खासकर 10 करोड़ से ऊपर आय वाले कैटेगरी में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई। यह दर्शाता है कि टॉप-एंड इनकम ग्रुप में आय की गति मजबूत है, और टैक्स सिस्टम成熟 हो रहा है। हालांकि, यह नई वेल्थ क्रिएशन से ज्यादा बेहतर रिपोर्टिंग का नतीजा है।
दूसरी तरफ, 5 लाख तक आय वाले सेगमेंट में ITR फाइलिंग में गिरावट आई है। यह मिडिल क्लास के निचले हिस्से में स्टैग्नेशन को दिखाता है। लेकिन 5 से 10 लाख आय वाले ग्रुप में डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई, जो ITR फाइलिंग में सबसे आगे है। इस सेगमेंट के लोग सैलरी TDS, छोटे निवेश और फ्रीलांसिंग से जुड़े होने की वजह से ज्यादा एक्टिव हैं। क्लियरटैक्स की रिपोर्ट से पता चलता है कि 25-35 साल के युवा मल्टी-सोर्स इनकम की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जिससे ITR-2 और ITR-3 फाइलिंग्स में 45% तक उछाल आया है।
| आय स्लैब (रुपये में) | ग्रोथ रेट (%) | मुख्य कारण |
|---|---|---|
| 0-5 लाख | नकारात्मक | कम compliance, आय स्थिरता |
| 5-10 लाख | डबल-डिजिट | सैलरी, फ्रीलांस, निवेश रिपोर्टिंग |
| 10-50 लाख | 15-20 | बिजनेस ग्रोथ, प्रोफेशनल एडवांसमेंट |
| 50 लाख-1 करोड़ | 20+ | वेज बढ़ोतरी, बोनस |
| 1 करोड़ से ऊपर | 22 | बेहतर ट्रैकिंग, AIS प्रभाव |
यह टेबल दिखाती है कि मिडिल इनकम ग्रुप, खासकर 5-10 लाख वाले, संख्या के लिहाज से ITR फाइलिंग में लीड कर रहे हैं। कुल फाइलिंग्स में उनका योगदान सबसे बड़ा है क्योंकि यह सेगमेंट जनसंख्या का बड़ा हिस्सा है और TDS जैसे सिस्टम उन्हें फाइलिंग के लिए मजबूर करते हैं। वहीं, उच्च स्लैब्स में ग्रोथ रेट ज्यादा है, लेकिन абсолют संख्या कम है।
ट्रेडर्स, इन्वेस्टर्स और फ्रीलांसर्स का योगदान भी बढ़ रहा है। 30 लाख से ज्यादा सैलरी वाले प्रोफेशनल्स में 23.34% ग्रोथ हुई, जो पिछले साल के 18.94% से ज्यादा है। यह दर्शाता है कि लोग सैलरी से आगे बढ़कर स्टॉक ट्रेडिंग, क्रिप्टो और साइड बिजनेस में जा रहे हैं। आयकर विभाग की सख्ती, जैसे TDS और TCS ट्रैकिंग, ने compliance को बढ़ावा दिया है।
कुल मिलाकर, टैक्स सिस्टम में ऊपरी स्तर पर मजबूती आ रही है, लेकिन ब्रॉड बेस की कम ग्रोथ चिंता का विषय है। 5-10 लाख वाले सेगमेंट की लीडरशिप से साफ है कि मिडिल क्लास टैक्स सिस्टम का बैकबोन बना हुआ है। उच्च आय वालों की ग्रोथ से सरकारी राजस्व बढ़ेगा, लेकिन निचले सेगमेंट में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
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Disclaimer: यह लेख समाचार रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है।






