स्लीपर बसों में आग का खतरा: सरकार का सख्त फैसला जो बचाएगा लाखों जानें, 6 महीनों में 6 बड़ी घटनाएं!

By Ravi Singh

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स्लीपर बस में आग लगने की घटना और नए सुरक्षा नियमों की घोषणा
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*”केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए नया नियम लागू किया है, जिसमें केवल प्रमाणित ऑटोमोबाइल कंपनियां या सरकारी मान्यता प्राप्त फैक्टरियां ही कोच बनाएंगी। मौजूदा बसों में फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और लाइटिंग अनिवार्य होंगी। पिछले 6 महीनों में 6 प्रमुख आग की घटनाओं ने 50 से अधिक मौतें कराईं, जिससे यह कदम जरूरी हो गया।”

केंद्र सरकार ने सड़क परिवहन मंत्रालय के माध्यम से स्लीपर बसों के निर्माण पर सख्ती बरतते हुए फैसला लिया कि अब से केवल प्रमाणित ऑटोमोबाइल कंपनियां या सरकारी मान्यता वाली फैक्टरियां ही इन बसों के कोच तैयार करेंगी। स्थानीय वर्कशॉप या अनट्रेंड मजदूरों द्वारा बनाए गए कोच अब प्रतिबंधित होंगे, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाली निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री आग लगने का मुख्य कारण बनी है।

नए नियमों के तहत सभी मौजूदा स्लीपर बसों को रेट्रोफिट करना अनिवार्य होगा, जिसमें फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट के लिए हैमर, इमरजेंसी लाइटिंग और ड्राइवर ड्राउजीनेस अलर्ट शामिल हैं। यदि ड्राइवर थकान महसूस करता है, तो सिस्टम स्वचालित रूप से अलार्म बजाएगा। बस बॉडी कोड में संशोधन के बाद ईंधन टैंक की लोकेशन, इलेक्ट्रिकल वायरिंग और फायर एक्सटिंग्विशर की संख्या पर विशेष जोर दिया गया है, जिसमें कम से कम दो एक्सटिंग्विशर हर बस में रखने होंगे।

पिछले 6 महीनों में देशभर में स्लीपर बसों में आग लगने की 6 प्रमुख घटनाएं दर्ज हुईं, जो निर्माण दोष और रखरखाव की कमी से जुड़ी हैं। इन हादसों में कुल 50 से अधिक लोग मारे गए, जबकि दर्जनों घायल हुए। घटनाओं का विवरण निम्न तालिका में है:

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घटना तिथिस्थानमौतेंकारण
जुलाई 15, 2025उत्तर प्रदेश8इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट से आग
सितंबर 10, 2025तेलंगाना12ईंधन लीक और लोकल फिटिंग दोष
अक्टूबर 24, 2025कुर्नूल, आंध्र प्रदेश20ट्रक से टक्कर के बाद आग, निम्न सामग्री
नवंबर 5, 2025मध्य प्रदेश5बैटरी ओवरहीटिंग
दिसंबर 25, 2025चित्रदुर्गा, कर्नाटक9ट्रक से दुर्घटना के बाद तेज आग
जनवरी 2, 2026समृद्धि एक्सप्रेसवे, महाराष्ट्र1टक्कर के बाद आग, इमरजेंसी एग्जिट ब्लॉक

ये घटनाएं दर्शाती हैं कि अधिकतर मामलों में लोकल रूप से रेट्रोफिटेड बसें शामिल थीं, जहां इंटीरियर में ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल हुआ। सरकार का अनुमान है कि नए नियमों से आग की घटनाओं में 70% तक कमी आएगी, क्योंकि प्रमाणित कंपनियां जैसे Tata Motors या Ashok Leyland ही निर्माण करेंगी, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं।

मंत्रालय ने सभी स्लीपर बसों की जांच के लिए सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिए हैं, जिसमें अगले 3 महीनों में सभी बसों का ऑडिट होगा। ऑपरेटर्स को नए सिस्टम इंस्टॉल करने के लिए सब्सिडी दी जाएगी, लेकिन अनुपालन न करने पर लाइसेंस रद्द किया जाएगा। यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करेगा, खासकर लंबी दूरी की यात्राओं में जहां यात्री सोते हुए सफर करते हैं।

प्रमुख बदलावों की सूची:

निर्माण: केवल ऑटोमोबाइल कंपनियां या मान्यता प्राप्त फैक्टरियां।

रेट्रोफिट: फायर अलार्म, ऑटोमैटिक सप्रेशन, इमरजेंसी लाइट।

ड्राइवर सुरक्षा: ड्राउजीनेस डिटेक्शन सिस्टम।

सामग्री: ज्वलनशील पदार्थों पर प्रतिबंध, मजबूत इलेक्ट्रिकल सिस्टम।

जांच: सभी बसों का अनिवार्य ऑडिट और प्रमाणन।

यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होंगे, जिससे बस ऑपरेटर्स को अपनी फ्लीट अपडेट करने की आवश्यकता पड़ेगी।

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Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट स्रोतों पर आधारित है।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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