“PwC पार्टनर रणेन बनर्जी ने दावा किया कि RBI फरवरी की MPC बैठक में रेपो रेट नहीं घटाएगा, क्योंकि आर्थिक विकास मजबूत है और मुद्रास्फीति नियंत्रण में। उन्होंने इसे ‘बुलेट बर्बाद करने’ जैसा बताया, जबकि निजी कैपेक्स मांग अनिश्चितता से प्रभावित है। 2025 में 125 bps कटौती के बाद रेट 5.25% पर है, लेकिन आगे लंबा ठहराव संभव।”
PwC के पार्टनर और इकोनॉमिक एडवाइजरी सर्विसेज लीडर रणेन बनर्जी ने RBI की मौद्रिक नीति पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि फरवरी 4-6 की MPC बैठक में रेपो रेट में कोई कटौती नहीं होगी। बनर्जी के अनुसार, मौजूदा स्थिति में दर घटाना ‘बुलेट बर्बाद करने’ जैसा होगा, क्योंकि विकास दर मजबूत बनी हुई है और मुद्रास्फीति पूरी तरह नियंत्रण में।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी क्षेत्र का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) ब्याज दरों से नहीं, बल्कि मांग की अनिश्चितता से रुका हुआ है। क्षमता उपयोग फिलहाल 70-75% के स्तर पर है, जो 85% तक पहुंचने पर ही निजी निवेश को गति देगा। यदि विकास संकेतक मजबूत रहते हैं और बेस ईयर रिवीजन से बेहतर अनुमान मिलते हैं, तो दर कटौती की कोई जरूरत नहीं।
2025 में RBI ने चार बार रेपो रेट घटाया, कुल 125 आधार अंकों की कटौती के साथ इसे 6.5% से 5.25% तक लाया। दिसंबर 2025 की बैठक में आखिरी 25 bps कटौती हुई, जिसके बाद न्यूट्रल स्टांस बरकरार रखा गया। RBI का लक्ष्य CPI मुद्रास्फीति को 4% पर रखना है, जिसमें +/-2% की मार्जिन है। FY26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 2% पर है, जो दर कटौती चक्र के खत्म होने का संकेत देता है।
बनर्जी ने आगे कहा कि MPC लंबे ठहराव पर जारी रह सकती है, क्योंकि विकास और मुद्रास्फीति की स्थिति संतुलित है। ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि मुद्रास्फीति 2% के आसपास बनी रही, तो 2026 में अतिरिक्त कटौती की गुंजाइश बनेगी, लेकिन फरवरी में बदलाव की संभावना नगण्य। ICRA जैसी एजेंसियां मानती हैं कि दर कटौती चक्र समाप्त हो चुका है।
प्रमुख आर्थिक संकेतक
राहत के लिए मुख्य बिंदु
फरवरी MPC में स्टेटस क्वो की उम्मीद, कोई कटौती नहीं।
| संकेतक | वर्तमान स्तर | प्रभाव |
|---|---|---|
| रेपो रेट | 5.25% | EMI और लोन पर असर, कोई तत्काल राहत नहीं |
| मुद्रास्फीति (CPI) | 2% (FY26 अनुमान) | नियंत्रित, दर कटौती की जरूरत कम |
| विकास दर | मजबूत (7-8% अनुमान) | निजी निवेश को बढ़ावा, लेकिन मांग अनिश्चित |
| क्षमता उपयोग | 70-75% | 85% तक पहुंचने पर कैपेक्स गति पकड़ेगा |
यदि क्षमता उपयोग 85% पहुंचे और मांग स्थिर हो, तो 2026 की दूसरी छमाही में कटौती संभव।
उधारकर्ताओं को EMI राहत के लिए विकास-मुद्रास्फीति संतुलन पर नजर रखनी चाहिए।
ब्रोकरेजेज जैसे Morgan Stanley और Goldman Sachs 2026 में 50 bps तक अतिरिक्त कटौती का अनुमान लगाते हैं, लेकिन यह मुद्रास्फीति पर निर्भर।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट सूत्रों पर आधारित है। निवेश या वित्तीय निर्णय के लिए विशेषज्ञ सलाह लें।






