“केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने EV सेक्टर के लिए बैटरी मैन्युफैक्चरिंग पर कस्टम ड्यूटी छूट को मार्च 2028 तक बढ़ाया, लिथियम-आयन सेल्स और पार्ट्स पर कंसेशनल ड्यूटी बेनिफिट्स जारी रखे, क्रिटिकल मिनरल्स के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की, और 4,000 ई-बसों की खरीद का प्रावधान किया। इन कदमों से बैटरी कॉस्ट घटने की उम्मीद है, लेकिन तत्काल EV कीमतों में कमी नहीं आएगी; लॉन्ग टर्म में लोकल प्रोडक्शन बढ़ने से कीमतें कम हो सकती हैं, जिससे EV एडॉप्शन तेज होगा।”
Budget 2026: EV सेक्टर पर बजट का प्रभाव
केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जो मुख्य रूप से सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करती हैं। इनमें लिथियम-आयन बैटरी प्रोडक्शन के लिए कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट को मार्च 2028 तक एक्सटेंड करना शामिल है, जो बैटरी मेकर्स को लोकल फैक्टरियां स्थापित करने में मदद करेगा। इससे EV की बैटरी कॉस्ट में कमी आएगी, क्योंकि आयात पर निर्भरता घटेगी और घरेलू उत्पादन बढ़ेगा।
EV इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि ये छूटें बैटरी पैक की कीमत को 10-15% तक कम कर सकती हैं, जो EV की कुल कॉस्ट का 40-50% हिस्सा होता है। उदाहरण के लिए, Tata Nexon EV जैसी कारों की बैटरी कॉस्ट वर्तमान में ₹4-5 लाख के आसपास है, जो लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ने से ₹3.5 लाख तक गिर सकती है। हालांकि, ये फायदे तुरंत नहीं दिखेंगे, क्योंकि नई फैक्टरियां सेटअप होने में 12-18 महीने लग सकते हैं।
बजट में क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट और निकेल के लिए रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना की घोषणा भी EV सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में ये कॉरिडोर माइनिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक की पूरी वैल्यू चेन कवर करेंगे। इससे भारत की आयात निर्भरता कम होगी, जो वर्तमान में चीन से 70% से अधिक क्रिटिकल मिनरल्स पर है। पिछले साल 2025 में सप्लाई चेन डिसरप्शन के कारण EV प्रोडक्शन में 5-7% की गिरावट आई थी, लेकिन ये कॉरिडोर स्थिरता लाएंगे और कीमतों को कंट्रोल में रखेंगे।
EV इंफ्रास्ट्रक्चर को बूस्ट देने के लिए बजट में पूर्वोदय राज्यों के लिए 4,000 ई-बसों की खरीद का प्रावधान है, जो पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देगा। इससे EV मैन्युफैक्चरर्स जैसे Tata Motors और Ashok Leyland को बड़े ऑर्डर मिलेंगे, जो उनकी कैपेसिटी यूटिलाइजेशन को 80% तक ले जा सकता है। साथ ही, बायोगैस ब्लेंड्स पर एक्साइज रिलीफ से CNG व्हीकल्स की कीमतें थोड़ी कम हो सकती हैं, लेकिन EV पर फोकस मजबूत है।
क्या EV कीमतें कम होंगी? बजट में GST रिडक्शन या नई डिमांड इंसेंटिव्स की कमी से तत्काल कीमतों में गिरावट नहीं आएगी। वर्तमान में EV पर 5% GST है, जबकि ICE व्हीकल्स पर 28%, लेकिन कोई नया बदलाव नहीं। हालांकि, लॉन्ग टर्म में बैटरी और मिनरल ड्यूटी एग्जेम्प्शन से कीमतें 8-12% तक घट सकती हैं। उदाहरणस्वरूप, Mahindra XUV400 EV की मौजूदा कीमत ₹15-18 लाख है, जो 2027 तक ₹13-15 लाख तक आ सकती है, अगर लोकल बैटरी प्रोडक्शन स्केल अप होता है।
EV सेक्टर में प्रमुख घोषणाओं का ब्रेकडाउन
EV इंडस्ट्री की चुनौतियां और बजट का समाधान
| घोषणा | विवरण | EV सेक्टर पर प्रभाव | संभावित कीमत प्रभाव |
|---|---|---|---|
| लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी छूट एक्सटेंशन | मार्च 2028 तक जारी, 35 नए कैपिटल गुड्स को लिस्ट में शामिल | लोकल बैटरी फैक्टरियां बढ़ेंगी, आयात कम होगा | बैटरी कॉस्ट 10-15% कम, EV कीमतें लॉन्ग टर्म में 5-8% घटेंगी |
| लिथियम-आयन सेल्स और पार्ट्स पर कंसेशनल ड्यूटी बेनिफिट्स | EV और हाइब्रिड व्हीकल्स के लिए दो साल और बढ़ाया | बैटरी स्टोरेज और एनर्जी सिस्टम्स सस्ते होंगे | EV बैटरी वॉरंटी बेहतर, कुल कॉस्ट ऑफ ओनरशिप 20% तक कम |
| रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना | ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में माइनिंग से मैन्युफैक्चरिंग तक | क्रिटिकल मिनरल्स की घरेलू उपलब्धता बढ़ेगी | EV मोटर्स और इलेक्ट्रॉनिक्स की कॉस्ट 7-10% घटेगी |
| 4,000 ई-बसों की खरीद | पूर्वोदय राज्यों के लिए, टूरिज्म और पब्लिक मोबिलिटी पर फोकस | EV OEMs को बड़े ऑर्डर, कैपेसिटी बढ़ेगी | बड़े स्केल प्रोडक्शन से EV कीमतें 3-5% कम हो सकती हैं |
| क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पर ड्यूटी छूट | सोडियम एंटीमोनेट जैसे इनपुट्स पर वेवर | सोलर और EV बैटरी वैल्यू चेन मजबूत होगी | कुल EV प्रोडक्शन कॉस्ट 5% तक कम |
बजट EV सेक्टर की प्रमुख चुनौतियों को एड्रेस करता है। बैटरी आयात पर निर्भरता एक बड़ी समस्या है, जहां ग्लोबल प्राइस फ्लक्चुएशन से EV कीमतें प्रभावित होती हैं। ड्यूटी एग्जेम्प्शन से घरेलू मैन्युफैक्चरर्स जैसे Amara Raja और Exide को बूस्ट मिलेगा, जो 2027 तक बैटरी प्रोडक्शन कैपेसिटी को दोगुना कर सकते हैं। SIAM के अनुसार, ये कदम EV इकोसिस्टम को मजबूत बनाएंगे और इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएशन को सपोर्ट करेंगे।
क्रिटिकल मिनरल्स की कमी से EV प्रोडक्शन में देरी होती है, लेकिन रेयर अर्थ कॉरिडोर से सप्लाई चेन सिक्योर होगी। 2025 में चीन से रेयर अर्थ सप्लाई कट्स से भारतीय EV मेकर्स को 10% प्रोडक्शन लॉस हुआ था, लेकिन अब ये कॉरिडोर लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन देंगे। साथ ही, ई-बस खरीद से पब्लिक ट्रांसपोर्ट में EV एडॉप्शन बढ़ेगा, जो प्राइवेट कस्टमर्स के लिए चार्जिंग इंफ्रा को बेहतर बनाएगा।
EV कीमतों पर लॉन्ग टर्म आउटलुक
हालांकि बजट में डायरेक्ट कंज्यूमर इंसेंटिव्स नहीं हैं, लेकिन सप्लाई-साइड सपोर्ट से EV कीमतें धीरे-धीरे कम होंगी। FAME स्कीम के तहत पहले से चल रही सब्सिडी के साथ ये घोषणाएं EV को ICE व्हीकल्स के मुकाबले अधिक कॉम्पिटिटिव बनाएंगी। उदाहरण के लिए, Ola Electric S1 Pro की कीमत ₹1.3 लाख है, जो बैटरी कॉस्ट रिडक्शन से ₹1.1 लाख तक आ सकती है। इंडस्ट्री लीडर्स जैसे Uno Minda के मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना है कि ये पॉलिसी कंटिन्यूटी EV ग्रोथ को सपोर्ट करेगी और इंपोर्ट डिपेंडेंस कम करेगी।
बजट कैपेक्स को ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाने से CV डिमांड बढ़ेगी, जिसमें ई-बसें शामिल हैं। डिफेंस सेक्टर में मीडियम और हेवी व्हीकल्स की खरीद से EV मैन्युफैक्चरर्स को स्टेबिलिटी मिलेगी। कुल मिलाकर, EV सेक्टर में निवेश बढ़ेगा, जो 2028 तक भारत को EV एक्सपोर्ट हब बना सकता है।
EV कस्टमर्स के लिए टिप्स
बैटरी मैन्युफैक्चरिंग छूट का फायदा उठाने के लिए 2027 तक EV खरीदने का प्लान बनाएं, जब लोकल प्रोडक्शन बढ़ेगा।
ई-बस प्रोजेक्ट्स से शहरों में चार्जिंग स्टेशंस बढ़ेंगे, इसलिए अर्बन एरिया में EV चुनें।
क्रिटिकल मिनरल कॉरिडोर से लॉन्ग टर्म में स्पेयर पार्ट्स सस्ते होंगे, जो मेंटेनेंस कॉस्ट कम करेगा।
मौजूदा FAME सब्सिडी का उपयोग करें, जो EV खरीद पर ₹10,000-50,000 तक की बचत देती है।
हाइब्रिड ऑप्शंस पर विचार करें, जहां ड्यूटी बेनिफिट्स EV पार्ट्स को कवर करते हैं।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है, स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है।






