“वैश्विक निवेश बैंकिंग दिग्गज मॉर्गन स्टैनली ने अपने कुल कार्यबल के लगभग 3% यानी करीब 2500 कर्मचारियों की छंटनी की घोषणा की है। यह कदम 2025 में रिकॉर्ड राजस्व के बावजूद लिया गया, जहां कंपनी ने निवेश बैंकिंग और वेल्थ मैनेजमेंट में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। छंटनी तीन प्रमुख डिवीजन—इन्वेस्टमेंट बैंकिंग एंड ट्रेडिंग, वेल्थ मैनेजमेंट और इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट—में प्रभावित हुई है, लेकिन फाइनेंशियल एडवाइजर्स इससे बाहर रखे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह छंटनी AI से सीधे जुड़ी नहीं है, बल्कि प्रदर्शन समीक्षा, लागत नियंत्रण और ग्लोबल लोकेशन स्ट्रैटेजी के रिव्यू का नतीजा है।”
मॉर्गन स्टैनली की छंटनी: रिकॉर्ड प्रदर्शन के बीच बड़ा झटका
मॉर्गन स्टैनली ने मार्च 2026 की शुरुआत में ही अपने वैश्विक स्तर पर लगभग 2500 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह संख्या कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 3 प्रतिशत है। 31 दिसंबर 2025 तक कंपनी में दुनिया भर के 40 से अधिक देशों में 82,992 कर्मचारी कार्यरत थे। छंटनी की यह लहर अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय ऑफिस दोनों को प्रभावित कर रही है।
कंपनी ने 2025 में निवेश बैंकिंग और ट्रेडिंग डिवीजन में अब तक का सबसे अधिक राजस्व कमाया, साथ ही वेल्थ मैनेजमेंट बिजनेस में भी रिकॉर्ड प्रदर्शन किया। इसके बावजूद यह फैसला लागत कम करने, बिजनेस प्राथमिकताओं को रिअलाइन करने और ग्लोबल ऑपरेशंस को अधिक कुशल बनाने के लिए लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, यह छंटनी पिछले साल मार्च में की गई 2000 कर्मचारियों की कटौती के बाद दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
किन विभागों पर सबसे ज्यादा असर?
छंटनी मुख्य रूप से तीन प्रमुख सेगमेंट में हुई:
इन्वेस्टमेंट बैंकिंग एंड ट्रेडिंग : डीलमेकिंग और ट्रेडिंग से जुड़े रोल्स प्रभावित।
वेल्थ मैनेजमेंट : क्लाइंट सर्विस और मैनेजमेंट से जुड़े कुछ पद।
इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट : एसेट मैनेजमेंट और रिलेटेड फंक्शंस।
हालांकि, कंपनी के फाइनेंशियल एडवाइजर्स को इस छंटनी से बाहर रखा गया है, क्योंकि यह सेगमेंट क्लाइंट रिलेशनशिप पर आधारित है और राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है।
AI की वजह से छंटनी? सच्चाई क्या है
हाल के वर्षों में AI और ऑटोमेशन को लेकर कई कंपनियों में छंटनी की खबरें आई हैं, लेकिन मॉर्गन स्टैनली के मामले में स्थिति अलग है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह छंटनी AI अपनाने से सीधे जुड़ी नहीं है। कंपनी ने प्रदर्शन मूल्यांकन, बिजनेस रीअलाइनमेंट और लोकेशन स्ट्रैटेजी के आधार पर यह कदम उठाया है। वैश्विक स्तर पर वोलेटाइल मार्केट्स, जियोपॉलिटिकल टेंशन और AI से जुड़े पुराने टेक्नोलॉजी बिजनेस में डिसरप्शन की चिंताओं के बीच ट्रेडिंग डेस्क मजबूत बने हुए हैं, लेकिन कुल मिलाकर कंपनी ने खर्च नियंत्रण को प्राथमिकता दी।
भारतीय संदर्भ में क्या मायने?
भारत में बैंकिंग सेक्टर अभी AI से जुड़ी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचा हुआ है। HDFC Bank के CEO सशिधर जगदीशन ने अक्टूबर 2025 में स्पष्ट कहा था कि AI से उनके बैंक में कोई छंटनी नहीं होगी, बल्कि यह बैकएंड से फ्रंटएंड और टेक रोल्स में कर्मचारियों को शिफ्ट करने का अवसर बनेगा। भारतीय प्राइवेट बैंकों जैसे HDFC, ICICI और Axis में AI का इस्तेमाल प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन और कस्टमर एक्सपीरियंस बेहतर करने के लिए हो रहा है, न कि जॉब कट्स के लिए।
हालांकि, ग्लोबल ट्रेंड्स से सबक लेते हुए भारतीय बैंकिंग सेक्टर में स्किल अपग्रेडेशन पर जोर बढ़ रहा है। Morgan Stanley जैसी घटनाएं भारतीय युवाओं और बैंकिंग प्रोफेशनल्स के लिए चेतावनी हैं कि AI और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में रोल्स तेजी से बदल रहे हैं।
आगे क्या?
यह छंटनी 2026 की शुरुआत में ही बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में ग्लोबल बैंकिंग में AI और ऑटोमेशन से 2 लाख तक जॉब्स प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन भारत जैसे मार्केट में फोकस जॉब क्रिएशन और रीडेप्लॉयमेंट पर रहेगा। कर्मचारियों के लिए अब स्किल रीस्किलिंग और नए टेक-ड्रिवन रोल्स में ट्रांजिशन जरूरी हो गया है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और रिपोर्ट्स पर आधारित है। इसमें कोई निवेश सलाह नहीं है।






