“F1 कार का दिल कहलाने वाला पावर यूनिट यानी इंजन अकेला ही 88 करोड़ रुपये से ज्यादा का पड़ता है, जबकि पूरी कार की लागत 20 मिलियन डॉलर के आसपास पहुंचती है। 2026 के नए रेगुलेशंस में MGU-H हटने और इलेक्ट्रिक पावर बढ़ने से भी लागत प्रभावित हुई है, लेकिन इंजन अब भी सबसे महंगा हिस्सा बना हुआ है।”
F1 कार के इंजन की हैरान कर देने वाली कीमत! 88 करोड़ का तो सिर्फ इंजन है, देखें पार्ट्स की पूरी लिस्ट
Formula 1 में कार की परफॉर्मेंस का सबसे बड़ा राज छिपा होता है उसके पावर यूनिट में। यह 1.6-लीटर टर्बोचार्ज्ड V6 हाइब्रिड इंजन होता है, जो इंटरनल कॉम्बस्शन इंजन (ICE), टर्बोचार्जर (TC), MGU-K, MGU-H (2025 तक), एनर्जी स्टोर (ES) और कंट्रोल इलेक्ट्रॉनिक्स (CE) से मिलकर बनता है। वर्तमान में एक सिंगल पावर यूनिट की कीमत लगभग 10-16 मिलियन डॉलर के बीच है, जो भारतीय रुपये में करीब 83-133 करोड़ तक पहुंचती है। कई रिपोर्ट्स में इसे औसतन 15 मिलियन डॉलर (लगभग 125 करोड़) या उससे ज्यादा बताया जाता है, लेकिन हालिया अनुमानों में 2026 के लिए मैक्सिमम सप्लाई प्राइस 17 मिलियन यूरो (करीब 150 करोड़ रुपये) तक सीमित है, हालांकि एक्स्ट्रा सर्विसेज और कस्टमाइजेशन से यह और बढ़ सकता है।
FIA के नियमों के तहत 2026 से पावर यूनिट मैन्युफैक्चरर्स पर अलग से 130 मिलियन डॉलर का सालाना कॉस्ट कैप लागू है, जो डेवलपमेंट और सप्लाई को कंट्रोल करता है। इससे पहले यह 95 मिलियन डॉलर था। 2026 में MGU-H हटने से कॉम्प्लेक्सिटी कम हुई है, लेकिन MGU-K की पावर 350 kW तक बढ़ गई है, जिससे इलेक्ट्रिक हिस्सा 50% तक पहुंच गया है। कुल मिलाकर पावर यूनिट अब भी F1 कार का सबसे महंगा कंपोनेंट है।
एक पूरी F1 कार की अनुमानित लागत 15-20 मिलियन डॉलर (125-167 करोड़ रुपये) के बीच है। यहां प्रमुख पार्ट्स की ब्रेकडाउन लिस्ट दी गई है (अनुमानित औसत कीमतें, वर्तमान ट्रेंड्स के आधार पर):
पावर यूनिट (हाइब्रिड इंजन) : 10-16 मिलियन डॉलर (83-133 करोड़ रुपये) – सबसे महंगा हिस्सा, जिसमें ICE, TC, MGU-K आदि शामिल।
कार्बन फाइबर मोनोकोक चेसिस : 6-7 लाख डॉलर (5-6 करोड़ रुपये) – सेफ्टी और स्ट्रक्चर का आधार।
गियरबॉक्स (8-स्पीड सेमी-ऑटोमैटिक) : 3-5 लाख डॉलर (2.5-4 करोड़ रुपये) – रियर में इंटीग्रेटेड, हाई-स्ट्रेस कंपोनेंट।
फ्रंट और रियर विंग्स (एरो पैकेज) : 1-2 लाख डॉलर प्रति सेट (80 लाख-1.6 करोड़ रुपये) – डाउनफोर्स जनरेट करने के लिए।
सस्पेंशन सिस्टम : 3-5 लाख डॉलर (2.5-4 करोड़ रुपये) – प्रिसिजन हैंडलिंग के लिए।
हाइड्रॉलिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स : 1-2 लाख डॉलर (80 लाख-1.6 करोड़ रुपये)।
स्टीयरिंग व्हील : 50,000-60,000 डॉलर (40-50 लाख रुपये) – डिस्प्ले और कंट्रोल्स से लैस।
हैलो डिवाइस : 15,000-20,000 डॉलर (12-16 लाख रुपये) – सेफ्टी फीचर।
फ्यूल टैंक : 1-1.5 लाख डॉलर (80 लाख-1.2 करोड़ रुपये)।
टायर्स (एक सेट) : 2,500-3,000 डॉलर (2-2.5 लाख रुपये) – लेकिन सीजन में कई सेट लगते हैं।
ये कीमतें मैन्युफैक्चरिंग, R&D और लो-वॉल्यूम प्रोडक्शन पर आधारित हैं। एक टीम सीजन में कई पावर यूनिट यूज करती है, क्योंकि FIA नियमों के तहत लिमिटेड यूनिट्स (जैसे 4 ICE, 4 TC आदि) की अनुमति है। एक सीजन में इंजन बदलाव से टीम 50-60 मिलियन डॉलर तक खर्च कर सकती है।
2026 रेगुलेशंस में बदलाव से पावर यूनिट ज्यादा रोड-रिलेवेंट हो गया है, क्योंकि सस्टेनेबल फ्यूल और हाई इलेक्ट्रिक आउटपुट फ्यूचर कारों के लिए उपयोगी है। मैन्युफैक्चरर्स जैसे Mercedes, Ferrari, Honda, Red Bull Powertrains (Ford के साथ) और नया Audi अब पावर सप्लाई कर रहे हैं।
यह महंगाई F1 की टेक्नोलॉजी को दर्शाती है, जहां हर पार्ट एक्सट्रीम परफॉर्मेंस, लाइटवेट और रिलायबिलिटी के लिए बनाया जाता है। एक छोटी सी गलती भी करोड़ों का नुकसान कर सकती है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट विभिन्न उपलब्ध अनुमानों और इंडस्ट्री ट्रेंड्स पर आधारित है। कीमतें मुद्रा विनिमय, सप्लायर और स्पेसिफिकेशन के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।






