बजट 2026 में नई टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाने के लिए हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन इंटरेस्ट पर डिडक्शन की उम्मीद; मिडिल क्लास को सालाना 50,000 रुपये तक की बचत संभव; स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़कर 75,000 रुपये हो सकता है; ओल्ड रिजीम में भी मेडिकल इंश्योरेंस लिमिट 50,000 रुपये तक बढ़ाने की संभावना; होम लोन डिडक्शन से आवास सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।
नई टैक्स रिजीम में वर्तमान में कोई डिडक्शन उपलब्ध नहीं है, लेकिन बजट 2026 में सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक की छूट मिल सकती है, जो फैमिली कवर के लिए 50,000 रुपये तक बढ़ाई जा सकती है। इससे 30 प्रतिशत टैक्स ब्रैकेट वाले करदाताओं को 7,500 से 15,000 रुपये की अतिरिक्त बचत होगी। होम लोन इंटरेस्ट पर सेक्शन 24बी के तहत 2 लाख रुपये की मौजूदा लिमिट को नई रिजीम में शामिल करने से मेट्रो शहरों में औसत 5 लाख रुपये के सालाना इंटरेस्ट वाले लोन पर 60,000 रुपये की टैक्स बचत संभव है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव नई रिजीम को 70 प्रतिशत करदाताओं के लिए पसंदीदा बना सकता है, जहां फिलहाल केवल 40 प्रतिशत ही इसे चुन रहे हैं।
ओल्ड टैक्स रिजीम में हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन को सीनियर सिटिजन्स के लिए 50,000 से बढ़ाकर 75,000 रुपये करने की मांग है, जो महंगाई दर 6 प्रतिशत को देखते हुए उचित लगती है। होम लोन के लिए सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर इंटरेस्ट डिडक्शन को 2 लाख से 3 लाख रुपये तक बढ़ाने से रियल एस्टेट सेक्टर में 15 प्रतिशत की ग्रोथ देखी जा सकती है, खासकर टियर-2 शहरों में जहां हाउसिंग डिमांड 25 प्रतिशत बढ़ी है। नई रिजीम में इन डिडक्शंस को शामिल करने से सरकारी राजस्व पर 10,000 करोड़ रुपये का असर पड़ेगा, लेकिन इससे कंज्यूमर स्पेंडिंग में 5 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
नई बनाम ओल्ड टैक्स रिजीम: तुलनात्मक विश्लेषण
| पैरामीटर | नई टैक्स रिजीम (वर्तमान) | ओल्ड टैक्स रिजीम (वर्तमान) | बजट 2026 में संभावित बदलाव (नई रिजीम) |
|---|---|---|---|
| बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट | 3 लाख रुपये तक जीरो टैक्स | 2.5 लाख रुपये तक जीरो टैक्स | 3.5 लाख रुपये तक बढ़ सकती है |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | 50,000 रुपये | 50,000 रुपये | 75,000 रुपये तक बढ़ोतरी |
| हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन (सेक्शन 80डी) | उपलब्ध नहीं | 25,000 रुपये (इंडिविजुअल), 50,000 रुपये (फैमिली) | 25,000-50,000 रुपये शामिल |
| होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन (सेक्शन 24बी) | उपलब्ध नहीं | 2 लाख रुपये | 2-3 लाख रुपये तक शामिल |
| टैक्स स्लैब्स | 0-3 लाख: 0%, 3-6 लाख: 5%, 6-9 लाख: 10%, 9-12 लाख: 15%, 12-15 लाख: 20%, 15 लाख+: 30% | 0-2.5 लाख: 0%, 2.5-5 लाख: 5%, 5-10 लाख: 20%, 10 लाख+: 30% | स्लैब्स में 5% की औसत कमी संभव |
| कुल बचत उदाहरण (10 लाख आय वाले) | 1,12,500 रुपये टैक्स | 1,04,000 रुपये (डिडक्शंस के साथ) | 90,000 रुपये तक टैक्स (नए डिडक्शंस के साथ) |
यह तालिका दर्शाती है कि बजट 2026 में बदलाव से नई रिजीम ओल्ड से अधिक फायदेमंद हो सकती है, खासकर सैलरीड क्लास के लिए जहां औसत आय 8-12 लाख रुपये है। यदि हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन शामिल होता है, तो कोविड के बाद बढ़ी मेडिकल कॉस्ट्स (औसत 20 प्रतिशत) को देखते हुए 40 लाख परिवारों को राहत मिलेगी। होम लोन पर राहत से अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम्स में 30 प्रतिशत भागीदारी बढ़ सकती है, जहां पीएम आवास योजना के तहत 1 करोड़ नए आवेदन अपेक्षित हैं।
संभावित लाभ और प्रभाव
हेल्थ सेक्टर पर असर : नई रिजीम में 80डी डिडक्शन से इंश्योरेंस पॉलिसी होल्डर्स 15 प्रतिशत बढ़ सकते हैं, क्योंकि वर्तमान में केवल 35 प्रतिशत भारतीयों के पास हेल्थ कवर है। इससे प्राइवेट हॉस्पिटल्स में निवेश 25 प्रतिशत ऊपर जाएगा, जैसे कि अपोलो और फोर्टिस जैसे ब्रैंड्स में।
रियल एस्टेट बूस्ट : होम लोन इंटरेस्ट राहत से मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में प्रॉपर्टी खरीद 10 प्रतिशत बढ़ेगी, जहां औसत लोन अमाउंट 50 लाख रुपये है। इससे कंस्ट्रक्शन जॉब्स में 5 लाख नई नौकरियां सृजित होंगी।
मिडिल क्लास सेंटिमेंट : सर्वे के अनुसार, 60 प्रतिशत करदाता नई रिजीम को डिडक्शंस की कमी के कारण छोड़ रहे हैं; बजट बदलाव से यह ट्रेंड रिवर्स हो सकता है, जिससे जीडीपी ग्रोथ में 0.5 प्रतिशत का योगदान होगा।
सीनियर सिटिजन्स के लिए स्पेशल प्रावधान : 80डी लिमिट 1 लाख रुपये तक बढ़ाने से बुजुर्गों की मेडिकल एक्सपेंस (औसत 40,000 रुपये सालाना) पर 30 प्रतिशत बचत होगी, जो पेंशनर्स के लिए बड़ा राहत पैकेज होगा।
एनपीएस और अन्य निवेश : हालांकि फोकस हेल्थ और होम लोन पर है, लेकिन एनपीएस डिडक्शन को नई रिजीम में 50,000 रुपये तक जोड़ने की भी चर्चा है, जिससे रिटायरमेंट सेविंग्स 20 प्रतिशत बढ़ेंगी।
बजट 2026 में ये बदलाव मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को सपोर्ट करेंगे, जहां टैक्स राहत से डिस्पोजेबल इनकम बढ़कर 8 प्रतिशत कंजम्प्शन ग्रोथ लाएगी। यदि स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये होता है, तो 15 लाख आय वाले व्यक्ति को 7,500 रुपये की अतिरिक्त बचत मिलेगी, जो इंफ्लेशन रेट 5 प्रतिशत को ऑफसेट करेगी। होम लोन राहत से ईएमआई बर्डन 10 प्रतिशत कम होगा, खासकर फर्स्ट-टाइम बायर्स के लिए जहां इंटरेस्ट रेट्स 8.5 प्रतिशत हैं। हेल्थ इंश्योरेंस पर फोकस से पब्लिक हेल्थकेयर पर दबाव कम होगा, क्योंकि प्राइवेट इंश्योरेंस क्लेम्स 25 प्रतिशत ऊपर जाएंगे।
टैक्स प्लानिंग टिप्स बजट से पहले
मौजूदा ओल्ड रिजीम में रहें यदि आपके पास हाई डिडक्शंस हैं, लेकिन नई रिजीम में स्विच करने के लिए कैलकुलेट करें: यदि आपकी आय 12 लाख है और हेल्थ प्रीमियम 20,000 रुपये, तो नई राहत से 6,000 रुपये बचत।





