“केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मैन्युफैक्चरिंग को भारत की आर्थिक रीढ़ बनाने का स्पष्ट संकेत दिया है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, बायोफार्मा शक्ति, टेक्सटाइल के लिए एकीकृत कार्यक्रम, रेयर अर्थ कॉरिडोर और अन्य योजनाओं से सात रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया है, जिससे रोजगार सृजन, निर्यात बढ़ोतरी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की मजबूत स्थिति सुनिश्चित होगी।”
केंद्रीय बजट 2026-27 ने मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत को नई गति देने के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर अभूतपूर्व फोकस किया है। वित्त मंत्री ने सात प्रमुख रणनीतिक और फ्रंटियर सेक्टरों में लक्षित योजनाएं पेश कीं, जिनमें सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, रेयर अर्थ मटेरियल्स, टेक्सटाइल, केमिकल और स्पोर्ट्स गुड्स शामिल हैं। इनसे न केवल आयात निर्भरता कम होगी बल्कि लाखों रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
बजट में कैपिटल एक्सपेंडिचर को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाया गया है, जो मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत आधार देगा। प्रमुख योजनाओं में PLI स्कीम का विस्तार, नई स्कीम्स और क्लस्टर डेवलपमेंट पर जोर है।
नीचे सेक्टर-वार प्रमुख घोषणाएं और उनके प्रभाव दिए गए हैं:
| सेक्टर | प्रमुख घोषणा | आवंटन/विवरण | अपेक्षित प्रभाव |
|---|---|---|---|
| सेमीकंडक्टर | इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 लॉन्च, फुल-स्टैक IP, उपकरण और मटेरियल उत्पादन पर फोकस | इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के लिए ₹40,000 करोड़ | चिप डिजाइन और उत्पादन में आत्मनिर्भरता, 1 लाख+ स्किल्ड जॉब्स, ग्लोबल वैल्यू चेन में हिस्सेदारी |
| बायोफार्मा | बायोफार्मा शक्ति मिशन लॉन्च, बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स का घरेलू उत्पादन | 5 वर्षों में ₹10,000 करोड़ | भारत को ग्लोबल हब बनाने, 3 नए NIPER, 7 अपग्रेड, 1,000+ क्लीनिकल ट्रायल साइट्स, निर्यात बढ़ोतरी |
| रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स | रेयर अर्थ कॉरिडोर की स्थापना ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में | विशेष स्कीम के तहत क्लस्टर डेवलपमेंट | EV, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस में कच्चा माल उपलब्ध, चीन पर निर्भरता कम |
| टेक्सटाइल | पांच-घटक एकीकृत कार्यक्रम: नेशनल फाइबर स्कीम, टेक्सटाइल एक्सपैंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम, नेशनल हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट प्रोग्राम, टेक्स-इको इनिशिएटिव, समर्थ 2.0 | मेगा टेक्सटाइल पार्क्स, ग्रामीण आर्टिसन सपोर्ट | लेबर-इंटेंसिव सेक्टर में रोजगार, सस्टेनेबल टेक्सटाइल, खादी-हैंडीक्राफ्ट ब्रांडिंग, निर्यात में उछाल |
| इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स | इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का विस्तार | ₹40,000 करोड़ | असेंबली से आगे बढ़कर पार्ट्स उत्पादन, मोबाइल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में गहराई |
| केमिकल और कैपिटल गुड्स | तीन डेडिकेटेड केमिकल पार्क्स, हाई-टेक टूल रूम, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट स्कीम | चैलेंज मोड में प्लग-एंड-प्ले क्लस्टर | आयात कम, लॉजिस्टिक्स मजबूत, ₹10,000 करोड़ कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए |
| स्पोर्ट्स गुड्स और अन्य | स्पोर्ट्स इक्विपमेंट में R&D और इनोवेशन प्रमोशन, हाई-टेक टॉय मैन्युफैक्चरिंग | समर्पित इनिशिएटिव | ग्लोबल सप्लायर बनना, एमएसएमई को बूस्ट, युवा रोजगार |
सेमीकंडक्टर सेक्टर में नया अध्याय ISM 2.0 के तहत फोकस अब चिप फैब से आगे बढ़कर मशीनरी, मटेरियल और सप्लाई चेन पर है। भारतीय बौद्धिक संपदा (IP) विकसित करने, इंडस्ट्री-लेड रिसर्च सेंटर्स और स्किल्ड वर्कफोर्स पर जोर दिया गया है। इससे भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनेगा, खासकर जहां अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन के बीच वैकल्पिक स्रोत की मांग बढ़ रही है।
टेक्सटाइल सेक्टर को मिली नई रफ्तार टेक्सटाइल भारत का दूसरा सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। बजट में पांच-घटक कार्यक्रम से फाइबर स्तर पर आत्मनिर्भरता, मेगा टेक्सटाइल पार्क्स, सस्टेनेबल प्रैक्टिस और समर्थ 2.0 के जरिए स्किल अपग्रेडेशन होगा। महात्मा गांधी ग्राम स्वराज इनिशिएटिव से ग्रामीण आर्टिसन्स, खादी और हैंडीक्राफ्ट को ग्लोबल मार्केट से जोड़ा जाएगा। अमेरिकी टैरिफ चुनौतियों के बीच यह कदम निर्यात को स्थिर रखने में मददगार साबित होगा।
रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स EV और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए रेयर अर्थ मटेरियल्स महत्वपूर्ण हैं। चार खनिज-समृद्ध राज्यों में कॉरिडोर से माइनिंग से लेकर प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन बनेगी। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और डिफेंस-रिन्यूएबल सेक्टर मजबूत होंगे।
अन्य महत्वपूर्ण कदम बजट में 200 पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के रिवाइवल, हाई-प्रिसिजन कंपोनेंट्स के लिए टूल रूम और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग पर ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है। ये कदम लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को सस्ता और कुशल बनाएंगे।
इन घोषणाओं से मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी में योगदान बढ़ेगा, एमएसएमई मजबूत होंगे और भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
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