यूनियन बजट 2026 में सीनियर सिटीजन के लिए रेल टिकट पर पुरानी छूट बहाल होने की मजबूत संभावना है। महिलाओं को 50% और पुरुषों को 40% की छूट मिलने से फर्स्ट एसी क्लास की महंगी टिकटें आधी या उससे कम कीमत पर उपलब्ध हो सकती हैं, जैसे 3000 रुपये वाली टिकट महिलाओं के लिए 1500 रुपये और पुरुषों के लिए 1800 रुपये में। यह कदम बुजुर्ग यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा में बड़ी आर्थिक राहत देगा, खासकर जब हाल ही में किराए बढ़ाए गए हैं।
Budget 2026 में सीनियर सिटीजन को ट्रेन टिकट पर फिर मिल सकती है छूट
यूनियन बजट 2026 में भारतीय रेलवे के यात्री किराए में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच चर्चा चल रही है कि मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई सीनियर सिटीजन छूट योजना को फिर से लागू किया जा सकता है। यह छूट बुजुर्ग यात्रियों के लिए फर्स्ट एसी जैसी महंगी श्रेणियों में भी लागू होती थी, जिससे किराए में 40% से 50% तक की कमी आती थी।
इस योजना के बहाल होने से सबसे ज्यादा फायदा उन यात्रियों को होगा जो लंबी दूरी की यात्रा करते हैं और फर्स्ट एसी क्लास चुनते हैं। वर्तमान में कई प्रमुख रूट्स पर फर्स्ट एसी टिकट की कीमत 2500 से 5000 रुपये या उससे अधिक होती है। छूट लागू होने पर यह राशि काफी कम हो सकती है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई टिकट 3000 रुपये का है, तो महिलाओं को 50% छूट के बाद सिर्फ 1500 रुपये चुकाने पड़ेंगे, जबकि पुरुषों को 40% छूट पर 1800 रुपये देने होंगे।
छूट की पात्रता और दरें
छूट योजना की पुरानी शर्तें बहाल होने की उम्मीद है:
पुरुष यात्रियों के लिए न्यूनतम आयु 60 वर्ष और छूट 40%।
महिला यात्रियों के लिए न्यूनतम आयु 58 वर्ष और छूट 50%।
यह छूट टिकट बुकिंग के समय सिर्फ उम्र दर्ज करने पर स्वचालित रूप से लागू होती थी। कोई अलग प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र या विशेष कार्ड की जरूरत नहीं पड़ती थी। IRCTC ऐप, वेबसाइट और रेलवे काउंटर दोनों पर यह सुविधा उपलब्ध थी।
किन क्लास और ट्रेनों पर लागू होती थी छूट
पहले यह छूट लगभग सभी प्रमुख श्रेणियों पर उपलब्ध थी:
स्लीपर क्लास
| यात्री प्रकार | न्यूनतम आयु | छूट प्रतिशत | 3000 ₹ टिकट पर नई कीमत | 4000 ₹ टिकट पर नई कीमत |
|---|---|---|---|---|
| पुरुष | 60 वर्ष | 40% | 1800 ₹ | 2400 ₹ |
| महिला | 58 वर्ष | 50% | 1500 ₹ | 2000 ₹ |
थर्ड एसी
सेकंड एसी
फर्स्ट एसी
ट्रेनों में मेल/एक्सप्रेस, राजधानी, शताब्दी और अन्य लंबी दूरी की ट्रेनें शामिल थीं। हालांकि, लोकल और सबअर्बन ट्रेनों पर यह लागू नहीं होती थी। फर्स्ट एसी में छूट का फायदा लेने वाले यात्रियों की संख्या कम होने के बावजूद, कुल छूट राशि सालाना 1600-2000 करोड़ रुपये के आसपास अनुमानित थी, जो रेलवे के लिए सब्सिडी का बड़ा हिस्सा था।
क्यों बंद हुई थी छूट और अब क्यों बहाल होने की उम्मीद
मार्च 2020 में कोविड-19 के कारण यात्री संख्या में भारी गिरावट आई और रेलवे को भारी वित्तीय नुकसान हुआ। यात्री सेवाओं पर पहले से ही सब्सिडी चल रही थी, इसलिए छूट को स्थगित कर दिया गया। इसके बाद ट्रेन सेवाएं बहाल होने और किराए में कई बार बढ़ोतरी के बावजूद छूट नहीं लौटी। हाल के महीनों में यात्री किराए में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे आम यात्रियों पर बोझ बढ़ा है। ऐसे में सीनियर सिटीजन की मांग को देखते हुए बजट में इस छूट को बहाल करने पर गंभीर विचार चल रहा है।
यह कदम रेलवे की सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करेगा। बुजुर्ग अक्सर पेंशन या सीमित बचत पर निर्भर होते हैं और लंबी यात्रा उनके लिए महंगी पड़ती है। छूट से परिवार से मिलने, स्वास्थ्य जांच या तीर्थ यात्रा जैसी जरूरतें आसान हो जाएंगी। साथ ही, इससे ट्रेनों में फर्स्ट एसी की मांग बढ़ सकती है, जो रेलवे की आय को भी कुछ हद तक संतुलित कर सकती है।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
छूट सिर्फ आधार किराए पर लागू होती थी, सुपरफास्ट चार्ज, रिजर्वेशन शुल्क आदि पर नहीं।
टिकट कैंसिलेशन या रिफंड के नियम सामान्य ही रहते थे।
हालिया किराया वृद्धि (दिसंबर 2025 से लागू) के बाद भी छूट बहाल होने से बुजुर्गों पर असर कम होगा।
बजट में रेलवे के लिए कुल पूंजीगत व्यय बढ़ने की भी उम्मीद है, लेकिन यात्री सुविधाओं पर फोकस रहेगा।
यह बदलाव भारतीय रेलवे को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी और अपेक्षाओं पर आधारित है। अंतिम फैसला बजट घोषणा में ही स्पष्ट होगा।






