“हरियाणा सरकार गुरुग्राम के पास द्वारका एक्सप्रेसवे पर ग्लोबल सिटी प्रोजेक्ट में भारत की सबसे ऊँची बिल्डिंग बनाने की तैयारी में है। यह टावर मौजूदा Palais Royale (320 मीटर) से कहीं ऊँचा होगा और सिंगापुर, दुबई तथा यूरोप के प्रमुख स्काईस्क्रेपर्स को कड़ी चुनौती देगा। प्रोजेक्ट की लागत हजारों करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में नया मील का पत्थर साबित होगा।”
हरियाणा ग्लोबल सिटी: भारत का नया स्काईलाइन चेहरा
हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम के निकट द्वारका एक्सप्रेसवे के किनारे 1000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में ग्लोबल सिटी प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। इस मेगा प्रोजेक्ट के केंद्र में भारत की सबसे ऊँची इमारत का निर्माण प्रस्तावित है, जो मौजूदा सबसे ऊँची इमारत Palais Royale (320 मीटर, मुंबई) को पीछे छोड़ देगी। यह टावर हरियाणा के Sector 36B और 37B में विकसित होगा, जहाँ इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की ऑफिस स्पेस, लक्जरी रेजिडेंशियल यूनिट्स, होटल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स भी शामिल होंगे।
प्रस्तावित टावर की ऊँचाई अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है, लेकिन सरकारी सूत्रों के अनुसार यह 400 मीटर से अधिक होगी, जो इसे सुपरटॉल कैटेगरी में लाएगा। दुनिया की सबसे ऊँची इमारत Burj Khalifa (828 मीटर, दुबई) से तो यह कम होगी, लेकिन एशिया के कई प्रमुख शहरों जैसे सिंगापुर के Tanjong Pagar Centre (290 मीटर) या यूरोप के The Shard (310 मीटर, लंदन) से ऊँचा या बराबर स्तर का होगा। इससे भारत का ग्लोबल स्काईस्क्रेपर मैप पर नया स्थान बनेगा।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएँ और लागत अनुमान
क्षेत्रफल और स्केल : ग्लोबल सिटी कुल 1003 एकड़ में फैला होगा, जिसमें यह टावर मुख्य आकर्षण बनेगा।
उद्देश्य : विदेशी निवेश आकर्षित करना, हाई-टेक जॉब्स पैदा करना और NCR को इंटरनेशनल बिजनेस हब बनाना।
लागत : पूरा ग्लोबल सिटी प्रोजेक्ट हजारों करोड़ रुपये का है, जिसमें मुख्य टावर की निर्माण लागत अकेले 5000-8000 करोड़ रुपये तक अनुमानित है। प्रति वर्ग मीटर निर्माण लागत हाई-राइज टावरों में 2-3 लाख रुपये से अधिक होती है, और एडवांस्ड इंजीनियरिंग, सिस्मिक रेसिस्टेंस और लक्जरी फिनिशिंग के कारण खर्च बढ़ जाता है।
टाइमलाइन : इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल चुका है। डिजाइन और पर्यावरण क्लीयरेंस के बाद निर्माण 2026-27 में शुरू हो सकता है, पूरा होने में 8-10 साल लग सकते हैं।
डेवलपमेंट मॉडल : पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) या प्राइवेट डेवलपर्स के साथ, जिसमें बड़े रियल एस्टेट ग्रुप शामिल हो सकते हैं।
भारत के मौजूदा टॉप टॉल बिल्डिंग्स से तुलना
| क्रम | इमारत का नाम | स्थान | ऊँचाई (मीटर) | फ्लोर | स्थिति | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1 | Lokhandwala Minerva | मुंबई | 301 | 78 | पूरा (2023) | वर्तमान में भारत की सबसे ऊँची पूरी इमारत |
| 2 | Palais Royale | मुंबई | 320 | 84 | टॉप्ड आउट/अंडर कंप्लीशन | जल्द भारत की सबसे ऊँची बनेगी |
| 3 | प्रस्तावित ग्लोबल सिटी टावर | गुरुग्राम | 400+ (अनुमानित) | TBD | प्लानिंग/अप्रूवल स्टेज | भारत की नई रिकॉर्ड होल्डर बनेगा |
मुंबई अभी भारत का स्काईस्क्रेपर हब है, लेकिन हरियाणा का यह प्रोजेक्ट NCR को नई पहचान देगा। दिल्ली-एनसीआर में जमीन उपलब्धता और इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ के कारण सुपरटॉल प्रोजेक्ट्स की संभावना बढ़ी है।
ग्लोबल कॉम्पिटिशन में भारत की स्थिति
दुबई : Burj Khalifa (828 मीटर) – लक्जरी और टूरिज्म का प्रतीक।
सिंगापुर : Guoco Tower (290 मीटर) – बिजनेस हब।
यूरोप : The Shard (310 मीटर) – मॉडर्न आर्किटेक्चर।
भारत का योगदान : नया टावर एशिया में भारत को मजबूत पोजिशन देगा, जहाँ चीन और मलेशिया जैसे देश सुपरटॉल में आगे हैं।
यह प्रोजेक्ट न केवल ऊँचाई का रिकॉर्ड बनेगा, बल्कि सस्टेनेबल डिजाइन, ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी और स्मार्ट सिटी फीचर्स से लैस होगा। इससे रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और टूरिज्म सेक्टर में लाखों रोजगार सृजन की उम्मीद है।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और सरकारी घोषणाओं पर आधारित है। आधिकारिक अपडेट के लिए संबंधित विभाग से संपर्क करें।






