“नई रिटेल महंगाई सीरीज (CPI 2024 बेस ईयर) में पान, तंबाकू और मादक पदार्थों का वेटेज 2.38% से बढ़कर 2.99% हो गया है, जिससे महंगाई के आंकड़ों में तंबाकू उत्पादों की कीमतों का प्रभाव बढ़ सकता है। अर्थशास्त्री इसे चिंताजनक मान रहे हैं क्योंकि इससे हेडलाइन इन्फ्लेशन में अस्थिरता आ सकती है और नीतिगत फैसलों पर असर पड़ सकता है, जबकि चबाने वाले तंबाकू का वेटेज लगभग 760% तक बढ़ा है।”
नई रिटेल महंगाई सीरीज में तंबाकू उत्पादों का वेटेज बढ़ने पर क्यों चिंता जता रहे अर्थशास्त्री?
भारत में महंगाई मापने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। Ministry of Statistics and Programme Implementation (MoSPI) ने CPI की नई सीरीज जारी की है, जिसमें आधार वर्ष 2012 से बदलकर 2024 कर दिया गया है। यह बदलाव Household Consumption Expenditure Survey (HCES) 2023-24 के आधार पर किया गया है, जिससे उपभोग पैटर्न को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सके।
नई सीरीज में कुल आइटम्स की संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है। COICOP 2018 फ्रेमवर्क को अपनाया गया है, जिससे 12 डिवीजन में वर्गीकरण हुआ है। फूड एंड बेवरेजेस का वेटेज 45.86% से घटकर 36.75% रह गया है, जबकि हाउसिंग का वजन 17.67% तक पहुंच गया है।
लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पान, तंबाकू और इंटॉक्सिकेंट्स कैटेगरी के वेटेज बढ़ने पर हो रही है। पुरानी सीरीज में यह 2.38% था, जो नई सीरीज में 2.99% हो गया है। विशेष रूप से चबाने वाले तंबाकू उत्पादों (जैसे गुटखा, जर्दा आदि) का वेटेज 0.05% से बढ़कर 0.43% तक पहुंच गया, यानी करीब 760% की बढ़ोतरी।
अर्थशास्त्रियों की मुख्य चिंताएं इस प्रकार हैं:
महंगाई आंकड़ों में अतिरिक्त अस्थिरता — तंबाकू उत्पादों की कीमतें अक्सर टैक्स बढ़ोतरी, रेगुलेटरी बदलाव या सप्लाई चेन मुद्दों से प्रभावित होती हैं। इनका ज्यादा वेटेज होने से हेडलाइन CPI में अनावश्यक उतार-चढ़ाव आ सकता है, जो फूड कीमतों की तरह वोलेटाइल नहीं होता लेकिन पॉलिसी को प्रभावित कर सकता है।
कोर इन्फ्लेशन पर असर — नई सीरीज में कोर इन्फ्लेशन (फूड और फ्यूल को छोड़कर) का वेटेज बढ़ा है। तंबाकू को इंटॉक्सिकेंट्स में शामिल करने से कोर में भी इसका प्रभाव बढ़ेगा, जिससे अंडरलाइंग प्राइस प्रेशर का सही आकलन मुश्किल हो सकता है। जनवरी 2026 में कोर CPI पुरानी सीरीज के मुकाबले अलग दिखा है।
उपभोग पैटर्न का सही प्रतिबिंब? — HCES 2023-24 से पता चलता है कि तंबाकू उत्पादों की खपत में वृद्धि हुई है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। लेकिन कई अर्थशास्त्री मानते हैं कि स्वास्थ्य जोखिमों और ग्लोबल ट्रेंड्स (तंबाकू नियंत्रण) को देखते हुए इसे ज्यादा वेटेज देना उचित नहीं। इससे महंगाई के आंकड़े कम उपभोक्ता-केंद्रित लग सकते हैं।
मॉनेटरी पॉलिसी पर प्रभाव — RBI अपनी ब्याज दर नीति CPI के आधार पर तय करता है। अगर तंबाकू की वजह से हेडलाइन इन्फ्लेशन बढ़ता दिखे, तो अनावश्यक टाइटनिंग हो सकती है, जबकि असल इकोनॉमिक प्रेशर अलग हो। जनवरी 2026 में नई सीरीज के तहत रिटेल इन्फ्लेशन 2.75% रही, जिसमें ग्रामीण 2.73% और शहरी 2.77% है। फूड इन्फ्लेशन 2.13% रही।
मुख्य बदलावों की तुलना (वेटेज % में)
| श्रेणी | पुरानी सीरीज (2012) | नई सीरीज (2024) | बदलाव |
|---|---|---|---|
| फूड एंड बेवरेजेस | 45.86 | 36.75 | -9.11 |
| पान, तंबाकू और इंटॉक्सिकेंट्स | 2.38 | 2.99 | +0.61 |
| क्लोदिंग एंड फुटवियर | 6.53 | 6.38 | -0.15 |
| हाउसिंग | 10.07 | 17.67 | +7.60 |
| ट्रांसपोर्ट | – | 8.80 | बढ़ा |
यह बदलाव महंगाई मापने को ज्यादा सटीक बनाने के लिए है, लेकिन तंबाकू वेटेज बढ़ने से बहस छिड़ गई है। अर्थशास्त्री सुझाव दे रहे हैं कि भविष्य में स्वास्थ्य नीतियों को ध्यान में रखकर वेटेज रिव्यू किया जाए।
Disclaimer: यह एक न्यूज रिपोर्ट है, जिसमें उपलब्ध आंकड़ों और विशेषज्ञ मतों पर आधारित विश्लेषण शामिल है।






