“कल 27 फरवरी को भारत की जीडीपी की नई श्रृंखला जारी होगी, जिसमें आधार वर्ष 2022-23 होगा। तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर 2025) में 8% से अधिक वृद्धि की उम्मीद है। नई गणना में जीएसटी डेटा, इलेक्ट्रिक वाहन, घरेलू सहायकों और ड्राइवर जैसी अनौपचारिक सेवाओं को शामिल किया जाएगा, जिससे अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर अधिक सटीक बनेगी। मजबूत घरेलू मांग और त्योहारी खपत से ग्रामीण-शहरी उपभोग बढ़ा है।”
कल आएंगे नई गणना वाले जीडीपी आंकड़े! आर्थिक रफ्तार में जुड़ेगा जीएसटी-EV से लेकर मेड, ड्राइवर तक का काम
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) कल यानी 27 फरवरी को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की संशोधित श्रृंखला जारी करेगा। यह 11 वर्षों बाद आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जा रहा है। नई सीरीज में अर्थव्यवस्था की मौजूदा संरचना को बेहतर ढंग से दर्शाया जाएगा, जिसमें डिजिटल कॉमर्स, सर्विस सेक्टर की बढ़ती भूमिका और अनौपचारिक क्षेत्र की सेवाएं शामिल होंगी।
इस बार की रिलीज में वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी अग्रिम अनुमान (Second Advance Estimates) के साथ पिछले तीन वित्त वर्षों के संशोधित आंकड़े और तिमाही जीडीपी अनुमान भी आएंगे। विशेष रूप से अक्टूबर-दिसंबर 2025 (Q3 FY26) के आंकड़े सबसे ज्यादा चर्चा में रहेंगे।
उच्च-आवृत्ति संकेतकों के आधार पर अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि Q3 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 8% से 8.1% के बीच रह सकती है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) रिसर्च की रिपोर्ट में इसे 8.1% करीब बताया गया है। मजबूत घरेलू मांग इसका मुख्य आधार बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से उपभोग मजबूत रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में त्योहारी सीजन के बाद खर्च में निरंतर सुधार दिखा। सरकारी राजकोषीय प्रोत्साहन और सेवा क्षेत्र की सक्रियता ने भी रफ्तार बनाए रखी।
पहले अग्रिम अनुमान में पूरे FY26 के लिए 7.4% वृद्धि का अनुमान था, जो पिछले वर्ष के 6.5% से बेहतर है। लेकिन Q3 के मजबूत प्रदर्शन से पूरे वर्ष की औसत वृद्धि में सुधार की संभावना बढ़ गई है। हालांकि, नई पद्धति में महत्वपूर्ण बदलावों के कारण पिछली तिमाहियों (Q1 और Q2) के आंकड़ों में संशोधन हो सकता है।
नई जीडीपी गणना में प्रमुख बदलाव
नई श्रृंखला में डिफ्लेटर की संख्या बढ़ाकर 500-600 कर दी गई है (पहले लगभग 180 थी), जिसमें नया CPI और पुरानी WPI सीरीज का बेहतर उपयोग होगा। इससे मूल्य समायोजन अधिक सटीक होगा।
जीएसटी डेटा का समावेश — माल और सेवा कर रिटर्न से व्यापार और उत्पादन का बेहतर अनुमान लगेगा।
EV और नई तकनीक — इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादन, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और संबंधित सेवाओं को शामिल किया जाएगा।
घरेलू सेवाएं — मेड (घरेलू नौकरानी), ड्राइवर, कुक जैसी अनौपचारिक सेवाओं का योगदान अब जीडीपी में जुड़ेगा, जो पहले छूट जाता था।
सीजनल एडजस्टमेंट — तिमाही आंकड़ों में मौसमी प्रभाव को समायोजित किया जाएगा, जिससे औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि अधिक यथार्थवादी दिखेगी।
डिजिटल और सर्विस सेक्टर — ई-कॉमर्स, फिनटेक और अन्य डिजिटल सेवाओं की बढ़ती हिस्सेदारी को प्रतिबिंबित किया जाएगा।
ये बदलाव अर्थव्यवस्था की वास्तविक आकार को बड़ा दिखा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नई सीरीज से नाममात्र जीडीपी में उछाल आएगा, जिससे भारत जापान को पीछे छोड़ चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
क्षेत्रवार प्रभाव और अपेक्षाएं
उपभोग — घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। ग्रामीण खपत में कृषि आय और मनरेगा से समर्थन मिला, जबकि शहरी क्षेत्र में वेतन वृद्धि और फेस्टिव स्पेंडिंग से बूस्ट।
निवेश — पूंजीगत व्यय में सरकारी फोकस जारी है, लेकिन कुछ रिपोर्ट्स में Q3 में सरकारी कैपेक्स में संकुचन का जिक्र है।
विनिर्माण और उद्योग — उच्च मूल्य उत्पादन की ओर शिफ्ट से GVA में सुधार। दिसंबर 2025 में IIP में मजबूत वृद्धि दर्ज हुई।
सेवा क्षेत्र — सबसे मजबूत प्रदर्शनकर्ता, जिसमें IT, फाइनेंशियल और अन्य सेवाएं शामिल।
नई गणना से जीडीपी आंकड़े अधिक व्यापक और सटीक होंगे, जो नीति-निर्माण, निवेश निर्णय और वैश्विक रैंकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कल के आंकड़े बाजार, निवेशकों और अर्थव्यवस्था के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न आर्थिक संकेतकों, विशेषज्ञ अनुमानों और उपलब्ध ट्रेंड्स पर आधारित है। आंकड़े आधिकारिक रिलीज के बाद ही अंतिम माने जाएंगे।






