“नए श्रम संहिताओं के 2026 में पूर्ण क्रियान्वयन से बेसिक सैलरी और डीए को कुल CTC का कम से कम 50% बनाना अनिवार्य हो जाएगा। इससे कर्मचारी की PF कटौती, ग्रेच्युटी और अन्य वैधानिक योगदान बढ़ेंगे, जिससे टेक-होम सैलरी में कमी आ सकती है। साथ ही टैक्स योग्य आय बढ़ने से टैक्स देनदारी भी प्रभावित होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में जेब पर असर पड़ेगा, लेकिन दीर्घकालिक रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा।”
घटने वाली है आपकी इन हैंड सैलरी? PF और टैक्स पर भी पड़ेगा असर
नए श्रम कानूनों के तहत वेतन की परिभाषा में बड़ा बदलाव आ रहा है। अब कुल CTC (कॉस्ट टू कंपनी) का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता (DA) और रिटेनिंग अलाउंस जैसे घटकों से बनना अनिवार्य है। पहले अधिकांश कंपनियां बेसिक को 30-40% रखती थीं ताकि PF और ग्रेच्युटी जैसी कटौतियां कम रहें।
यह बदलाव मुख्य रूप से चार श्रम संहिताओं – वेज कोड, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड – से आ रहा है, जिनका पूर्ण कार्यान्वयन 2026 में हो रहा है। इससे कर्मचारी की मासिक इन-हैंड सैलरी पर सीधा असर पड़ेगा क्योंकि PF (12% कर्मचारी योगदान) और अन्य डिडक्शन्स बढ़ जाएंगे।
मुख्य बदलाव क्या हैं?
बेसिक सैलरी का न्यूनतम स्तर : CTC का 50% बेसिक + DA होना चाहिए। शेष 50% में HRA, विशेष भत्ते, बोनस आदि शामिल होंगे।
PF योगदान : कर्मचारी और नियोक्ता दोनों 12% योगदान देते हैं। बेसिक बढ़ने से यह राशि सीधे बढ़ेगी। वर्तमान में PF सीलिंग 15,000 रुपये मासिक है, लेकिन कई कंपनियां इससे अधिक पर योगदान करती हैं। नया नियम इसे और अनिवार्य बनाएगा।
ग्रेच्युटी : 4.81% (15 दिन की सैलरी प्रति वर्ष) बेसिक + DA पर गणना। उच्च बेसिक से ग्रेच्युटी राशि बढ़ेगी।
टैक्स प्रभाव : अधिक बेसिक होने से HRA छूट कम मिल सकती है (पुरानी टैक्स व्यवस्था में)। नए टैक्स रिजीम में कोई छूट नहीं है, लेकिन कुल टैक्सेबल आय बढ़ सकती है क्योंकि टैक्स-सेविंग अलाउंस घटेंगे।
इन-हैंड सैलरी पर क्या असर?
उच्च बेसिक से वैधानिक कटौतियां बढ़ेंगी। हालांकि लेबर मिनिस्ट्री का कहना है कि PF सीलिंग 15,000 पर रहने से अधिकांश मामलों में टेक-होम ज्यादा नहीं बदलेगा, लेकिन वास्तविकता अलग है। अधिकांश मध्यम और उच्च वेतन वाले कर्मचारियों के लिए बेसिक पहले से ही 15,000 से अधिक होता है, इसलिए PF कटौती बढ़ेगी।
उदाहरण 1: CTC 12 लाख रुपये सालाना (मासिक 1 लाख रुपये)
| पैरामीटर | पुरानी संरचना (बेसिक 35%) | नई संरचना (बेसिक 50%) | अंतर |
|---|---|---|---|
| बेसिक + DA | 35,000 रुपये | 50,000 रुपये | +15,000 |
| HRA + अन्य अलाउंस | 65,000 रुपये | 50,000 रुपये | -15,000 |
| PF कटौती (कर्मचारी 12%) | 4,200 रुपये (बेसिक पर) | 6,000 रुपये | +1,800 |
| ग्रेच्युटी प्रोविजनिंग | ~1,700 रुपये | ~2,400 रुपये | +700 |
नोट: अन्य डिडक्शन्स (प्रोफेशनल टैक्स, इनकम टैक्स) अलग। CTC समान रखने पर अलाउंस घटने से टेक-होम कम होता है।
उदाहरण 2: CTC 24 लाख रुपये सालाना (मासिक 2 लाख रुपये)
पुरानी: बेसिक 50,000-60,000 रुपये, PF ~6,000-7,200 रुपये।
नई: बेसिक 1 लाख रुपये, PF 12,000 रुपये।
अतिरिक्त PF कटौती: 5,000-6,000 रुपये मासिक।
टैक्स: पुरानी व्यवस्था में HRA छूट कम, नए में कोई छूट नहीं। कुल टैक्स देनदारी 10-15% तक बढ़ सकती है।
टैक्स पर असर
पुरानी व्यवस्था : HRA, 80C (PF निवेश) से छूट मिलती थी। अब HRA कम होने से छूट घटेगी।
नई व्यवस्था : कोई छूट नहीं, लेकिन उच्च स्लैब में पहुंचने पर टैक्स दर बढ़ सकती है। हालांकि 2025-26 में 12 लाख तक रिबेट से कई लाभान्वित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मत: चार्टर्ड अकाउंटेंट डॉ. सुरेश सुराना के अनुसार, “टैक्स ऑप्टिमाइजेशन का लचीलापन कम होगा। कर्मचारी को PF बढ़ाने से 80C का फायदा मिल सकता है, लेकिन टेक-होम तुरंत प्रभावित होगा।”
विशेषज्ञों से समझें हिसाब-किताब
दीर्घकालिक फायदा : बड़ा PF कोष, उच्च ग्रेच्युटी, बेहतर सोशल सिक्योरिटी।
अल्पकालिक चुनौती : मासिक बजट प्रभावित। कंपनियां CTC बढ़ाकर समायोजित कर सकती हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में नहीं करतीं।
क्या करें : HR से नई स्ट्रक्चर की जानकारी लें। PF ऑप्ट-आउट (15,000 सीलिंग पर) पर विचार करें यदि संभव। टैक्स प्लानिंग के लिए CA से सलाह लें।
Disclaimer: यह सामान्य जानकारी और वर्तमान नियमों पर आधारित है। व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार अलग-अलग प्रभाव हो सकता है। वित्तीय निर्णय लेने से पहले प्रमाणित टैक्स या लेबर विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।






