क्या होती है भारत की ‘संचित निधि’, इसे क्यों कहते हैं सरकार का खजाना? बिना इजाजत के PM भी नहीं निकाल सकते पैसा.

By Ravi Singh

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भारत की संचित निधि का प्रतीकात्मक चित्र, जिसमें सरकारी खजाना और वित्तीय दस्तावेज दिखाई दे रहे हैं।
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“भारत की संचित निधि सरकार की मुख्य वित्तीय संरचना है, जहां सभी कर राजस्व, गैर-कर आय और ऋण जमा होते हैं। इसे ‘सरकार का खजाना’ कहा जाता है क्योंकि यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की आधारशिला है और व्यय के लिए संसद की अनुमति अनिवार्य है, यहां तक कि प्रधानमंत्री भी बिना मंजूरी पैसा नहीं निकाल सकते। 2025-26 बजट में इसके माध्यम से 50.65 लाख करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित है, जो आर्थिक विकास को गति देगा।”

भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) संविधान के अनुच्छेद 266(1) के तहत स्थापित मुख्य कोष है, जिसमें सरकार की सभी आय स्रोत एकत्रित होते हैं। यह फंड टैक्स रेवेन्यू जैसे इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स, GST, कस्टम्स ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी से प्राप्त धन को समाहित करता है। गैर-टैक्स रेवेन्यू में डिविडेंड, प्रॉफिट्स, इंटरेस्ट रिसीप्ट्स और अन्य आय शामिल हैं, जबकि ऋण और लोन रिकवरी भी इसी में जमा होते हैं। 2025-26 बजट अनुमानों के अनुसार, ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू 42.70 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें कॉर्पोरेट टैक्स से 10.82 लाख करोड़ और इनकम टैक्स से 14.38 लाख करोड़ रुपये का योगदान है।

इस फंड को ‘सरकार का खजाना’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह देश की वित्तीय स्थिरता का केंद्र बिंदु है, जो आर्थिक नीतियों को लागू करने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान करता है। इसमें जमा धन से ही रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में व्यय होता है। उदाहरण के लिए, 2024-25 के रिवाइज्ड एस्टीमेट्स में कुल व्यय 47.16 लाख करोड़ रुपये था, जिसमें कैपिटल एक्सपेंडीचर 10.18 लाख करोड़ रुपये शामिल था, जो इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा देता है। संचित निधि की संरचना सुनिश्चित करती है कि सरकारी खर्च पारदर्शी और जवाबदेह हो, क्योंकि यह पब्लिक फाइनेंस के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।

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संचित निधि की संरचना तीन प्रमुख हिस्सों में विभाजित है: रेवेन्यू अकाउंट, कैपिटल अकाउंट और चार्ज्ड एक्सपेंडीचर। रेवेन्यू अकाउंट में दैनिक संचालन से जुड़ी आय और व्यय आते हैं, जबकि कैपिटल अकाउंट में एसेट क्रिएशन और लोन रिलेटेड ट्रांजेक्शन शामिल होते हैं। 2025-26 में नेट टैक्स रिसीप्ट्स 28.37 लाख करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जो पिछले वर्ष के 25.57 लाख करोड़ से 11% अधिक है, जो टैक्स कलेक्शन में सुधार दर्शाता है। गैर-टैक्स रेवेन्यू 5.83 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जिसमें डिविडेंड और प्रॉफिट्स से 3.25 लाख करोड़ रुपये का हिस्सा है।

ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू: 42.70
नेट टैक्स रेवेन्यू: 28.37
कुल रेवेन्यू रिसीप्ट्स: 34.20

निकासी की प्रक्रिया सख्त है, जहां संसद की मंजूरी बिना किसी व्यय की अनुमति नहीं मिलती। अनुच्छेद 114 के तहत अप्रोप्रिएशन एक्ट पास होना जरूरी है, जो बजट में निर्धारित डिमांड फॉर ग्रांट्स पर आधारित होता है। यहां तक कि इमरजेंसी स्थितियों में भी, प्रेसिडेंट की अनुमति से एडवांस लिया जा सकता है, लेकिन बाद में संसद से अप्रूवल जरूरी है। 2025-26 में कुल व्यय 50.65 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें इंटरेस्ट पेमेंट्स 25% हिस्सा लेते हैं, जो डेब्ट मैनेजमेंट की चुनौती दर्शाता है। फिस्कल डेफिसिट 4.4% ऑफ GDP टारगेट किया गया है, जो फिस्कल कंसोलिडेशन की दिशा में कदम है।

प्रधानमंत्री या कोई भी अधिकारी बिना संसद की इजाजत पैसा नहीं निकाल सकता, क्योंकि यह संवैधानिक प्रावधान लोकतांत्रिक नियंत्रण सुनिश्चित करता है। उदाहरणस्वरूप, हाल के वर्षों में COVID-19 महामारी के दौरान भी, अतिरिक्त व्यय के लिए सप्लीमेंटरी ग्रांट्स संसद से पास कराए गए थे। संचित निधि से अलग, कंटिंजेंसी फंड ऑफ इंडिया अनफॉरसीन एक्सपेंडीचर के लिए है, लेकिन उसकी राशि सीमित (500 करोड़ रुपये) है और बाद में संचित निधि से रीइंबर्समेंट होता है। 2024-25 के रिवाइज्ड एस्टीमेट्स में कुल रिसीप्ट्स अन्यथा बोरोइंग्स 31.47 लाख करोड़ रुपये थे, जो अर्थव्यवस्था की रिकवरी ट्रेंड को दिखाता है।

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संचित निधि की भूमिका आर्थिक सुधारों में महत्वपूर्ण है, जैसे कि GST इम्प्लीमेंटेशन ने सेंट्रलाइज्ड रेवेन्यू कलेक्शन को मजबूत किया। 2025-26 में GST से 11.78 लाख करोड़ रुपये अनुमानित हैं, जो डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ते ट्रेंड पर आधारित है। स्टेट्स को उनका शेयर (2025-26 में 14.22 लाख करोड़ रुपये) इसी फंड से दिया जाता है, जो फेडरल स्ट्रक्चर को सपोर्ट करता है। कैपिटल रिसीप्ट्स में मार्केट लोन्स नेट 11.54 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट को फाइनेंस करेगा।

मुख्य विशेषताएं: संचित निधि पारदर्शिता सुनिश्चित करती है, क्योंकि सभी ट्रांजेक्शन ऑडिटेड होते हैं और CAG द्वारा रिव्यू किए जाते हैं।

चुनौतियां: बढ़ता डेब्ट (फिस्कल डेफिसिट से) फंड पर दबाव डालता है, लेकिन 2025-26 में डेब्ट टू GDP रेशियो को डिक्लाइनिंग पाथ पर रखने का लक्ष्य है।

हालिया ट्रेंड्स: 2023-24 एकチュअल्स में ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू 34.66 लाख करोड़ रुपये था, जो इकोनॉमिक रिवाइवल दर्शाता है।

भविष्य प्रभाव: डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे प्रोग्राम्स इसी फंड से फंडेड हैं, जो 2026 तक GDP ग्रोथ को 6.5-7% तक ले जाने में मदद करेंगे।

संचित निधि से जुड़े रेगुलेशंस FRBM एक्ट 2003 के तहत हैं, जो फिस्कल डिसिप्लिन इंफोर्स करते हैं। 2025-26 में इफेक्टिव कैपिटल एक्सपेंडीचर 15.5 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो जॉब क्रिएशन और इन्वेस्टमेंट को बूस्ट देगा। स्टेट्स और UTs को ट्रांसफर्स 25.60 लाख करोड़ रुपये होंगे, जो 12.5% बढ़ोतरी है। यह फंड इंडिया की फाइनेंशियल आर्किटेक्चर का बैकबोन है, जो सुनिश्चित करता है कि पब्लिक मनी का इस्तेमाल जनहित में हो।

Disclaimer: यह लेख सूचना उद्देश्यों के लिए है और किसी भी वित्तीय सलाह, रिपोर्ट या टिप्स का प्रतिनिधित्व नहीं करता। स्रोतों पर आधारित है लेकिन कोई गारंटी नहीं।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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