“पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना के तहत जनवरी 2026 तक 28.24 लाख से अधिक परिवारों को 16,061 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है। योजना में 22.65 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं, जो घरों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान करते हैं। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है, जिसमें 78,000 रुपये तक की सब्सिडी मिलती है, और गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्य सबसे आगे हैं।”
पीएम सूर्य घर मुक्त बिजली योजना ने भारत में रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहां 28,24,518 परिवारों को अब तक 16,061.12 करोड़ रुपये की केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस योजना के अंतर्गत 22,65,521 रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जो घरेलू बिजली की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहे हैं। योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों तक पहुंचना है, जिससे सालाना करोड़ों टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
योजना के लाभार्थियों में गुजरात सबसे ऊपर है, जहां सबसे अधिक सिस्टम लगाए गए हैं, उसके बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल और राजस्थान आते हैं। इन राज्यों में स्थानीय डिस्कॉम कंपनियां सक्रिय रूप से सहयोग कर रही हैं, जिससे इंस्टॉलेशन प्रक्रिया तेज हुई है। उदाहरण के लिए, गुजरात में सोलर पैनल की उपलब्धता और सब्सिडी वितरण की दक्षता ने हजारों परिवारों को बिजली बिल से मुक्ति दिलाई है।
सब्सिडी की संरचना क्षमता के आधार पर निर्धारित है, जो घरों की बिजली खपत को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है। 1 से 2 kW तक के सिस्टम के लिए प्रति kW 30,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जबकि 2 से 3 kW तक अतिरिक्त क्षमता पर 18,000 रुपये प्रति kW। कुल सब्सिडी 78,000 रुपये तक सीमित है, जो 3 kW से अधिक सिस्टम के लिए लागू होती है। विशेष राज्यों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का प्रावधान है, जो हिमालयी क्षेत्रों या पूर्वोत्तर राज्यों के परिवारों को अतिरिक्त लाभ देता है।
| सिस्टम क्षमता | मासिक बिजली यूनिट | सब्सिडी राशि (रुपये) | योग्यता |
|---|---|---|---|
| 1-2 kW | 0-150 | 30,000 से 60,000 | सामान्य घरेलू उपयोग |
| 2-3 kW | 150-300 | 60,000 से 78,000 | मध्यम खपत वाले परिवार |
| 3 kW से अधिक | 300 से ऊपर | 78,000 तक कैप | बड़े घर या अतिरिक्त जरूरतें |
यह योजना न केवल बिजली बिल को शून्य करती है बल्कि अतिरिक्त बिजली उत्पादन को ग्रिड में बेचने की सुविधा भी देती है, जिससे परिवारों को अतिरिक्त आय होती है। उदाहरणस्वरूप, एक 3 kW सिस्टम औसतन 3600 यूनिट सालाना उत्पादित करता है, जिसमें से 300 यूनिट मुफ्त उपयोग के बाद बाकी को नेट मीटरिंग के जरिए बेचा जा सकता है। इससे औसत परिवार को सालाना 15,000 से 20,000 रुपये की बचत होती है, साथ ही सिस्टम की लाइफ 25 वर्ष तक होने से लंबी अवधि में निवेश रिटर्न 15 प्रतिशत तक पहुंचता है।
आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जो पूरी तरह ऑनलाइन है। सबसे पहले pmsuryaghar.gov.in पोर्टल पर जाएं और ‘Apply for Rooftop Solar’ विकल्प चुनें। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें, जहां OTP वेरिफिकेशन के बाद प्रोफाइल डिटेल्स भरें। उसके बाद राज्य, जिला, डिस्कॉम कंपनी और कंज्यूमर अकाउंट नंबर दर्ज करें। आवेदन सबमिट करने पर वेंडर चयन की सुविधा मिलती है, जहां प्रमाणित वेंडरों की लिस्ट उपलब्ध होती है। वेंडर से एग्रीमेंट के 60 दिनों के अंदर इंस्टॉलेशन पूरा न होने पर वेंडर बदलने का विकल्प भी है।
आवश्यक दस्तावेज : आधार कार्ड, बिजली बिल की कॉपी, बैंक अकाउंट डिटेल्स और रूफटॉप की फोटो।
वेंडर चयन टिप्स : MNRE द्वारा प्रमाणित वेंडर चुनें, जिनकी रेटिंग 4 स्टार से ऊपर हो, और लोकल वेंडर को प्राथमिकता दें ताकि सर्विसिंग आसान हो।
लोन विकल्प : योजना में 5.75 प्रतिशत ब्याज दर पर कोलेटरल-फ्री लोन उपलब्ध है, जो सब्सिडी के बाद शेष राशि के लिए लिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, 3 kW सिस्टम की कुल लागत 1.5 लाख रुपये होने पर सब्सिडी के बाद 72,000 रुपये का लोन 5 वर्ष की EMI में चुकाया जा सकता है।
योजना के तहत ग्रुप हाउसिंग सोसायटी (GHS) या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के लिए अलग प्रावधान है, जहां कॉमन फैसिलिटीज के लिए प्रति kW 18,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जो 500 kW तक की क्षमता पर लागू होती है। इससे अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में EV चार्जिंग स्टेशन भी स्थापित किए जा सकते हैं, जो इलेक्ट्रिक व्हीकल यूजर्स के लिए फायदेमंद है।
राज्यों की भागीदारी योजना की सफलता का आधार है। गुजरात में 5 लाख से अधिक इंस्टॉलेशन हुए हैं, जहां राज्य सरकार अतिरिक्त इंसेंटिव दे रही है। महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे जैसे शहरों में रूफटॉप स्पेस की कमी को देखते हुए हाइब्रिड सिस्टम को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस है, जहां किसानों को PM-KUSUM योजना के साथ लिंक करके ड्यूल बेनिफिट मिल रहा है। केरल और राजस्थान में डेजर्ट और कोस्टल एरिया की क्लाइमेट कंडीशंस को ध्यान में रखकर सिस्टम डिजाइन किए गए हैं, जो हाई एफिशिएंसी मॉड्यूल्स का उपयोग करते हैं।
योजना से जुड़ी चुनौतियां भी हैं, जैसे रूफटॉप की उपलब्धता और मेंटेनेंस। हालांकि, सरकार ने 24×7 हेल्पलाइन और ऐप-बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू किया है, जो रीयल-टाइम प्रोडक्शन ट्रैक करता है। लाभार्थी ऐप से अपनी बिजली उत्पादन और बचत की रिपोर्ट देख सकते हैं, जो पारदर्शिता बढ़ाता है।
सोलर सिस्टम की तकनीकी विशेषताएं महत्वपूर्ण हैं। मोनोक्रिस्टलाइन पैनल्स की एफिशिएंसी 20 प्रतिशत तक होती है, जो पॉलीक्रिस्टलाइन से बेहतर है। इन्वर्टर का चयन ग्रिड-टाईड होना चाहिए, जो बैटरी स्टोरेज के बिना काम करता है। सिस्टम की वारंटी 25 वर्ष की होती है, जिसमें 10 वर्ष तक 90 प्रतिशत आउटपुट गारंटी मिलती है।
पर्यावरणीय प्रभाव : प्रत्येक 1 kW सिस्टम सालाना 1.5 टन CO2 उत्सर्जन कम करता है, जिससे योजना के तहत कुल कमी 3 करोड़ टन से अधिक हो सकती है।
आर्थिक लाभ : घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है, जहां PLI स्कीम के तहत 120 GW सोलर मॉड्यूल क्षमता विकसित हुई है।
सोशल इम्पैक्ट : ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, जहां वे सोलर इंस्टॉलेशन ट्रेनिंग ले रही हैं।
आवेदन के बाद प्रक्रिया में फिजिबिलिटी चेक, नेट मीटरिंग अप्रूवल और सब्सिडी डिस्बर्समेंट शामिल है, जो 30 दिनों में पूरा होता है। यदि आवेदन रिजेक्ट होता है, तो अपील की सुविधा है। योजना से जुड़े वेंडरों की संख्या 10,000 से अधिक है, जो पूरे देश में उपलब्ध हैं।
Disclaimer: यह समाचार और रिपोर्ट्स पर आधारित है, जिसमें टिप्स शामिल हैं। आधिकारिक जानकारी के लिए संबंधित स्रोतों से संपर्क करें।






