अमेरिका-ईरान युद्ध की आशंकाओं और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स 700 से 1400 पॉइंट्स तक टूटा, निफ्टी 24,600 के नीचे फिसला। निवेशकों को लाखों करोड़ का नुकसान हुआ, जबकि एनर्जी और ऑयल से जुड़े स्टॉक्स में मजबूत तेजी दर्ज की गई क्योंकि उच्च तेल मूल्य अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा पहुंचा रहे हैं।
अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच NSE-BSE में बड़ी गिरावट, एनर्जी सेक्टर में तेजी
अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध तेज हो गया है, जिससे ग्लोबल मार्केट्स में हड़कंप मच गया। भारतीय शेयर बाजार भी इस भू-राजनीतिक तनाव से बुरी तरह प्रभावित हुआ। बुधवार को बाजार में भारी गिरावट आई, जहां सेंसेक्स 1,100 से 1,700 पॉइंट्स तक लुढ़का और निफ्टी 380 से 500 पॉइंट्स नीचे बंद हुआ। शुक्रवार तक यह सिलसिला जारी रहा, जहां सेंसेक्स 700 पॉइंट्स से अधिक गिरकर 79,500 के आसपास ट्रेड कर रहा था और निफ्टी 24,600 के नीचे आ गया।
इस युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति में 20% तक की कमी का खतरा पैदा हो गया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत $84-86 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले कुछ दिनों में 5-13% तक उछली। इससे भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ा, जहां 80% से अधिक कच्चा तेल आयात होता है। रुपये में रिकॉर्ड गिरावट आई और महंगाई की आशंका से निवेशक रिस्क से दूर हो गए।
बाजार में FIIs की भारी बिकवाली देखी गई, जिसने गिरावट को और तेज किया। बैंकिंग, आईटी, रियल्टी और कंज्यूमर सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बैंक निफ्टी 2% से अधिक गिरा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 2-3% तक की गिरावट दर्ज हुई। कुल मिलाकर दो-तीन सत्रों में निवेशकों की संपत्ति में 10-16 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
इसके विपरीत एनर्जी सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखी गई। उच्च तेल कीमतों से अपस्ट्रीम ऑयल एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन कंपनियां लाभान्वित हुईं। ONGC, Oil India जैसी कंपनियों के शेयरों में 3-5% तक की बढ़त देखी गई। Reliance Industries के शेयर भी मजबूत रहे, क्योंकि भारत को रूसी तेल खरीद के लिए 30 दिनों की अमेरिकी छूट मिली। PSU ऑयल मार्केटिंग कंपनियां दबाव में रहीं, लेकिन ओवरऑल एनर्जी इंडेक्स में पॉजिटिव मोमेंटम बना रहा।
डिफेंस सेक्टर भी अपवाद रहा, जहां HAL, BEL जैसे स्टॉक्स में 2-5% तक की बढ़त दर्ज हुई, क्योंकि युद्ध से रक्षा खर्च बढ़ने की उम्मीद जगी। वहीं, एविएशन और एक्सपोर्ट से जुड़े स्टॉक्स में गिरावट आई, क्योंकि हॉर्मुज की समस्या से ईंधन लागत बढ़ी और सप्लाई चेन प्रभावित हुई।
सेक्टोरल परफॉर्मेंस की मुख्य बातें:
एनर्जी सेक्टर : +2-4% (उच्च क्रूड से फायदा)
ऑयल एंड गैस : अपस्ट्रीम स्टॉक्स मजबूत, डाउनस्ट्रीम दबाव में
बैंकिंग : -2% से अधिक (उच्च महंगाई और ब्याज दरों का डर)
आईटी : -1.5% (ग्लोबल रिस्क ऑफ मोड)
डिफेंस : +2-3% (युद्ध से बढ़ती मांग)
रियल्टी : -2% (महंगाई से मांग प्रभावित)
विश्लेषकों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो क्रूड $100 तक पहुंच सकता है, जिससे भारत में महंगाई बढ़ेगी और RBI की मौद्रिक नीति प्रभावित होगी। निवेशकों को शॉर्ट टर्म में सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, जबकि लॉन्ग टर्म में एनर्जी और डिफेंस सेक्टर में अवसर दिख रहे हैं। बाजार की अस्थिरता बनी हुई है, और कोई भी सकारात्मक समाचार युद्धविराम का संकेत बाजार को रिकवर करा सकता है।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट वास्तविक बाजार घटनाओं और ट्रेंड्स पर आधारित है। निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह लें।






