“अमेरिका-ईरान युद्ध की आशंका और हालिया हमलों के बीच गल्फ देशों, खासकर दुबई और यूएई से अरबपति और हाई-नेट-वर्थ निवेशक बड़े पैमाने पर अपना धन सुरक्षित ठिकानों जैसे सिंगापुर और हांगकांग की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं। कई परिवार ऑफिस और उद्यमी तत्काल ट्रांसफर की योजना बना रहे हैं, जबकि गल्फ राज्य अपने संप्रभु धन कोषों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि युद्ध से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सके।”
अमेरिका-ईरान युद्ध के साए में गल्फ के अरबपति खजाना समेटकर भाग रहे, इस ‘सुरक्षित’ देश में भेज रहे अपना पैसा
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए सैन्य अभियानों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई में मिसाइल और ड्रोन हमले दुबई, अबू धाबी, कतर और अन्य गल्फ शहरों पर हुए हैं। इन हमलों ने गल्फ क्षेत्र की ‘सुरक्षित आश्रय’ वाली छवि को गहरा झटका दिया है। दुबई, जो पिछले कुछ वर्षों में एशियाई और वैश्विक अरबपतियों का प्रमुख केंद्र बन चुका था, अब निवेशकों के लिए जोखिम भरा लगने लगा है।
हालिया घटनाओं में ईरानी हमलों के बाद दुबई फाइनेंशियल मार्केट इंडेक्स में 4.7% की तेज गिरावट आई, जो दो साल से अधिक समय में सबसे बड़ी एक दिवसीय गिरावट है। कई एशियाई अरबपति, जिनमें भारतीय उद्यमी भी शामिल हैं, अब अपना धन सिंगापुर और हांगकांग जैसे स्थिर वित्तीय केंद्रों में स्थानांतरित कर रहे हैं। सिंगापुर स्थित प्राइवेट वेल्थ वकीलों के अनुसार, उनके कई क्लाइंट्स (प्रत्येक के पास औसतन 50 मिलियन डॉलर की संपत्ति) ने इस सप्ताह संपर्क किया और तत्काल ट्रांसफर की योजना बनाई। एक क्लाइंट ने पूछा कि “सब कुछ सिंगापुर में कितनी जल्दी ट्रांसफर किया जा सकता है”।
एंडरसन ग्लोबल जैसी फर्मों में 10-20 परिवार ऑफिस ने मिडिल ईस्ट से एसेट्स वापस सिंगापुर ले जाने के बारे में पूछताछ की है। दो भारतीय उद्यमियों ने दुबई से 1 लाख डॉलर से अधिक की राशि सिंगापुर ट्रांसफर करने की कोशिश की, हालांकि शुरुआती तकनीकी गड़बड़ियों के कारण देरी हुई, लेकिन बाद में दूसरी बैंक के माध्यम से सफल हुआ।
यह रुझान केवल व्यक्तिगत अरबपतियों तक सीमित नहीं है। गल्फ के प्रमुख देश सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर अपने संप्रभु धन कोषों (सॉवरेन वेल्थ फंड्स) की समीक्षा कर रहे हैं, जो कुल मिलाकर 5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के हैं। इनमें से बड़े हिस्से अमेरिका और अन्य पश्चिमी बाजारों में निवेशित हैं। युद्ध से ऊर्जा निर्यात में कमी, पर्यटन और एविएशन सेक्टर की गिरावट, साथ ही रक्षा खर्च में वृद्धि के कारण बजट पर दबाव बढ़ा है।
एक गल्फ अधिकारी के अनुसार, तीन बड़े गल्फ अर्थव्यवस्थाओं ने संयुक्त रूप से चर्चा की है कि फोर्स मेज्योर क्लॉज का उपयोग कर वर्तमान अनुबंधों की समीक्षा की जाए और भविष्य के निवेश प्रतिबद्धताओं को कम किया जाए। पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गल्फ यात्रा के दौरान सऊदी अरब, यूएई और कतर ने अमेरिका में सैकड़ों अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था, लेकिन अब ये प्रतिबद्धताएं जोखिम में हैं।
दुबई में स्थित कई अरबपतियों ने प्राइवेट जेट से भागने के लिए 3.5 लाख डॉलर तक खर्च किए हैं। रियाद अब क्षेत्र से निकलने का प्रमुख मार्ग बन गया है, क्योंकि वहां का हवाई अड्डा अभी भी संचालित है। कई अमीर लोग दुबई से रियाद तक 10 घंटे की SUV यात्रा कर रहे हैं और फिर यूरोप या एशिया के लिए प्राइवेट जेट बुक कर रहे हैं।
प्रमुख प्रभावित क्षेत्र और आंकड़े
धन स्थानांतरण के प्रमुख गंतव्य : सिंगापुर और हांगकांग – कम कर, राजनीतिक स्थिरता और मजबूत वित्तीय ढांचा के कारण पसंदीदा।
दुबई का प्रभाव : 2025 में दुबई में 9,800 मिलियनेयर आए थे, जो 63 अरब डॉलर की संपत्ति लेकर आए। अब यह प्रवाह उलट रहा है।
सॉवरेन फंड्स : गल्फ के फंड्स में 3-5 ट्रिलियन डॉलर, जिनमें से 2 ट्रिलियन से अधिक अमेरिकी बाजारों में।
आर्थिक नुकसान : तेल निर्यात में कमी (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित), पर्यटन गिरावट, रक्षा खर्च बढ़ोतरी।
गल्फ अरबपतियों की रणनीति
कई गल्फ अरबपति अब प्राइवेट बंकर बना रहे हैं और एसेट्स को विविधीकृत कर रहे हैं। दुबई की लग्जरी इमेज के बावजूद, युद्ध ने सुरक्षा की भावना को तोड़ दिया है। यूएई के प्रमुख व्यवसायी खलाफ अहमद अल हब्तूर ने खुले तौर पर अमेरिकी नीतियों की आलोचना की और पूछा कि गल्फ देशों के अरबों डॉलर शांति के लिए थे या युद्ध के लिए।
यह स्थिति गल्फ की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लंबे समय तक चुनौती बनी रह सकती है, क्योंकि निवेशक स्थिरता की तलाश में अन्य क्षेत्रों की ओर मुड़ रहे हैं। सिंगापुर और हांगकांग जैसे केंद्र अब नए ‘सुरक्षित ठिकाने’ के रूप में उभर रहे हैं।
डिस्क्लेमर : यह खबर विभिन्न वैश्विक रिपोर्ट्स और बाजार रुझानों पर आधारित है। निवेश संबंधी कोई सलाह नहीं है।






